चना किसानों की बढ़ी चिंता, सता रहा लाखों के नुकसान का डर

नई दिल्ली 01-May-2026 04:02 PM

चना किसानों की बढ़ी चिंता, सता रहा लाखों के नुकसान का डर

(सभी तस्वीरें- हलधर)

राजस्थान में इस सीजन चने की बंपर पैदावार ने किसानों के चेहरों पर जो खुशी बिखेरी थी, वह अब सरकारी खरीद की विसंगतियों के कारण चिंता की लकीरों में बदल गई है। दालों की सरकारी खरीद के लिए निर्धारित स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) के कथित उल्लंघन और 40 क्विंटल की खरीद सीमा ने किसानों को संकट में डाल दिया है। इस गंभीर मुद्दे को लेकर किसान महापंचायत ने अब सीधे दिल्ली का दरवाजा खटखटाया है।

MSP और बाजार भाव का '775 रुपये' का खेल

किसान महापंचायत के राष्ट्रीय अध्यक्ष रामपाल जाट ने केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान को पत्र लिखकर हस्तक्षेप की मांग की है। आंकड़ों के मुताबिक, इस साल चने का न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) 5,875 रुपये प्रति क्विंटल है, जबकि खुले बाजार में व्यापारी केवल 5,100 से 5,200 रुपये के भाव दे रहे हैं।

जाट ने तर्क दिया कि यदि एक किसान 400 क्विंटल चना पैदा करता है और सरकार केवल 40 क्विंटल खरीदती है, तो बाकी 360 क्विंटल खुले बाजार में बेचने पर उसे 2.5 से 3 लाख रुपये का सीधा घाटा हो रहा है।

SOP की अनदेखी के गंभीर आरोप

रिपोर्ट के मुताबिक, राजस्थान में 5,000 से अधिक किसान MSP पर फसल बेचने के लिए पंजीकरण करा चुके हैं, लेकिन खरीद की प्रक्रिया सुस्त है।

सीमित खरीद केंद्र: फिलहाल केवल किशनगढ़ (अजमेर) जैसे चुनिंदा केंद्रों पर ही खरीद शुरू हो सकी है।

SOP का उल्लंघन: किसान महापंचायत का दावा है कि सरकारी गाइडलाइन (SOP) के अनुसार, पंजीकृत किसान की 100 प्रतिशत उपज खरीदी जानी चाहिए। बावजूद इसके, राजफेड (RAJFED) और नाफेड (NAFED) की खरीद प्रक्रिया में 40 क्विंटल की सीमा लगाकर किसानों को वापस लौटाया जा रहा है।

किसान महापंचायत की दो टूक मांगें

कैप हटाओ, पूरी फसल खरीदो: 40 क्विंटल की सीमा को तुरंत खत्म कर किसानों की पूरी उपज MSP पर ली जाए।

PDPS योजना लागू हो: यदि सरकार पूरी उपज खरीदने में सक्षम नहीं है, तो राजस्थान में प्राइस डेफिशिएंसी पेमेंट स्कीम (PDPS) लागू की जाए। इसके तहत किसान बाजार में फसल बेचेंगे और MSP व बाजार भाव के बीच के अंतर का भुगतान सीधे सरकार किसानों के खातों में करेगी।

संकट में 'मरुधरा' का अन्नदाता

राजस्थान के अधिकांश जिलों में अभी तक सरकारी कांटे नहीं खुले हैं। देरी होने की वजह से किसान अपनी उपज को औने-पौने दामों में बिचौलियों को बेचने पर मजबूर हैं। अब सबकी नजरें केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान पर हैं। क्या केंद्र सरकार SOP का पालन सुनिश्चित कर राजस्थान के चना किसानों को इस बड़े आर्थिक नुकसान से बचाएगी?


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