राजस्थान के डॉ. प्रभुलाल सैनी ने दुनिया को दी खजूर की 3 नई किस्में

नई दिल्ली 29-Dec-2025 12:13 PM

राजस्थान के डॉ. प्रभुलाल सैनी ने दुनिया को दी खजूर की 3 नई किस्में

(सभी तस्वीरें- हलधर)

शरद शर्मा

जयपुर। चुनाव में वोटों की फसल काटने वाले राजनेता जब किस्म के प्रजनक बन जाएं तो देश-दुनिया का चकित होना लाजमी है। क्योंकि, नेता अपने को किसान पुत्र तो कहते है, पर, खेती से उनका वास्ता कितना होता है, सब जानते है। लेकिन, इन सब में डॉ. प्रभुलाल विरले है। जी हां, आपका अंदाजा सही है, यहां बात प्रदेश के पूर्व कृषि मंत्री डॉ. प्रभुलाल सैनी की ही हो रही है। जो किसान के साथ-साथ राजनेता की भूमिका निभा रहे है। मरूधरा को खजूर की क्रांति देने वाले इस कृषि मंत्री ने अब अपने रिसर्च से देश-दुनिया का चौका दिया है। जो काम कृषि वैज्ञानिक नहीं कर पाएं, वो डॉ. प्रभुलाल ने कर दिखाया है। गौरतलब है प्रदेश के पूर्व कृषि मंत्री डॉ. प्रभुलाल सैनी ने खजूर की 3 नई किस्मों का विकास किया है। साथ ही, इन किस्मों का पेटेंट भी प्राप्त कर लिया है। संभवत: दुनिया में यह पहला ही मामला होगा, जिसमें एक किसान के नाम तीन किस्मों का पंजीयन हुआ हो। गौरतलब है प्रदेश में खूजर की खेती का श्री गणेश करने का श्रेय डॉ. प्रभुलाल सैनी की दूरगामी सोच का ही परिणाम है। 

नई किस्मों का यह मिला नाम

डॉ. सैनी द्वारा विकसित खजूर की तीन नई किस्मों का पंजीयन पौध किस्म और कृ षक अधिकार संरक्षण प्राधिकरण, नई दिल्ली में हुआ है। नई खजूर किस्म को एसटी-1, एसटी-2, एसटी-3 नाम दिया गया है। साथ ही, नई खजूर किस्मों का पेटेंट भी डॉ. सैनी को प्राप्त हो चुका है। 

एक नजर खजूर की खेती

गौरतलब है कि राजस्थान में वर्ष 2007-08 के दौरान पायलट प्रोजेक्ट के रूप में बाड़मेर-जैसलमेर जिले से अरब आयातित खजूर किस्मों की खेती शुरू हुई थी। वर्ष 2008-09 के दौरान सरकार ने खजूर की खेती का दायरा बढाते हुए करीब 13 जिलों के शामिल किया। वर्तमान में प्रदेश में करीब 3 हजार हैक्टयर क्षेत्र में खजूर की बरही, खुनेजी, मेडजूल, खलास सहित कुल पांच किस्मों की खेती किसान कर रहे है। 

वर्ष 2034 तक मिला लाइसेंस

कृषक अधिकार संरक्षण प्राधिकरण, नई दिल्ली के द्वारा डॉ. प्रभुलाल सैनी को किस्म उत्पादन, विक्रय, विपणन, वितरण, आयात-निर्यात के लिए आगामी 9 वर्ष यानी वर्ष 2034 तक के लिए लाइसेंस प्रदान किया है। 

चौकाने वाली बात ये 

बात करें डॉ. प्रभुलाल सैनी की तो वो राजनेता भी है और किसान भी है। लेकिन, आधुनिक कृषि शिक्षा का ककहरा उन्होंने कभी पढ़ा नहीं है। वर्ष 2015-16 के दौरान उनके कृषि नवाचारों को देखते हुए एमपीयूएटी, उदयपुर के द्वारा डॉ. सैनी को कृषि फिलोशपर की मानद उपाधि प्रदान की थी। बड़ी बात यह है कि कुछ किसान फसली किस्मो का विकास कर चुके है। लेकिन, बागवानी और बागवानी में भी खजूर किस्म का विकास टेढ़ी खीर है। संभवत: देश में अब तक कोई भी कृषि वैज्ञानिक खजूर किस्म का विकास नहीं कर पाया है। 


ट्रेंडिंग ख़बरें