किसान आलू की बुवाई से पहले इस बात को लेकर परेशान
(सभी तस्वीरें- हलधर)आलू उत्पादक किसान इनदिनों एक बड़ी समस्या का सामना कर रहे हैं। आलू की बुवाई से पहले ही किसानों के सामने संकट खड़ा हो गया है। आलू की खेती करने वालों किसानों को आलू के बीज नहीं मिल पा रहे हैं। ऐसे में ओडिशा जैसे आलू प्रधान राज्य के किसान इसको लेकर परेशान हैं। ताजा मामला ओडिशा राज्य केंद्रपाड़ा जिले का है, जहां आलू के बीजों की भारी कमी बुवाई के मौसम से पहले स्थानीय किसानों के लिए परेशानी का कारण बन गई है। आलू के अच्छी क्वालिटी के बीजों के अभाव में केंद्रपाड़ा के किसान समस्या का सामना कर रहे हैं। किसानों ने बागवानी विभाग पर आरोप लगाया है कि इस संकट को हल करने के लिए विभाग कोई प्रयास नहीं कर रहा है। एक आलू उत्पादक किसान ने कहा, 'मैंने नदी के पास अपनी दो एकड़ ज़मीन पर आलू बुवाई की योजना बनाई थी। लेकिन अधिकारियों ने बीज नहीं दिए, जिससे मेरी योजना को बहुत बड़ा झटका लगा है।' किसान ने कहा कि जिला बागवानी अधिकारी समय पर आलू के बीज उपलब्ध नहीं करा रहे हैं।
क्वालिटी बीजों कमी ने मजबूर किया
एक अन्य किसान ने कहा कि बुवाई के मौसम में क्वालिटी बीजों की मांग बढ़ गई है। लेकिन इस कमी ने उन किसानों को प्रभावित किया है जो अब सरकार से दखल देने की मांग कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि बीजों की कमी के कारण, कई किसान खुले बाजार से अधिक कीमत देकर घटिया बीज खरीदने को मजबूर हैं। केंद्रपाड़ा के बागवानी अधिकारी का कहना है कि हमें ओडिशा बीज निगम से अभी तक बीज नहीं मिले हैं। बीज मिलने के बाद, हम बीज किसानों को उपलब्ध कराएंगे।
375 हेक्टेयर जमीन के लिए उपलब्ध कराएगा विभाग
बागवानी अधिकारी ने कहा कि विभाग ने जिले में किसानों को 42.25 रुपये प्रति किलो की दर से प्रमाणित और सब्सिडी वाले बीज उपलब्ध कराने का फैसला किया है। किसानों को बीजों पर 75 प्रतिशत सब्सिडी भी दी जाएगी। उन्होंने कहा कि इस साल किसान जिले में नदी किनारे लगभग 700 हेक्टेयर जमीन पर आलू की फसल उगाएंगे। एक हेक्टेयर जमीन पर आलू उगाने के लिए 15 क्विंटल बीज की जरूरत होती है। हमारा विभाग जिले में 375 हेक्टेयर जमीन पर आलू की खेती के लिए किसानों को बीज उपलब्ध कराएगा।
आलू उत्पादन में आगे पर खपत भी अधिक
गौरतलब है कि ओडिशा में आलू की खेती बड़े स्तर पर की जाती है। आलू की प्रदेश में खपत भी बहुत अधिक है। राज्य में मांग पूर्ति के करने के लिए ओडिशा सरकार को पश्चिम बंगाल सरकार से आलू खरीदना पड़ता है। लेकिन पिछली बार मामला गंभीर हो गया था, क्योंकि बंगाल सरकार ने आलू के आयात पर रोक लगा दी थी। ममता सरकार का कहना था कि उनके यहां भी आलू की मांग अधिक है और भाव बढ़ने से बाजार में इसकी आपूर्ति प्रभावित हुई है। इस कारण वह बंगाल का स्टॉक किसी दूसरे राज्य में नहीं भेज सकती। मामले की गंभीरता को समझते हुए ओडिशा में कहीं इस बार भी आलू की कमी न पड़ जाए, इसके लिए सरकार ने व्यापक तैयारी की है। लेकिन अब उसके पहले ही किसानों को हो रही बीज की कमी ओडिशा सरकार के प्रयासों पर पानी फेर सकती है।