मसाला-औषधीय खेती किसानों के लिए लाभकारी
(सभी तस्वीरें- हलधर)भरतपुर। किसान आय बढौत्तरी के लिए फसल विविधीकरण अपनाएं। रबी में मसाला और औषधीय फसलो की खेती करके भी किसान अपनी आय में बढौत्तरी कर सकते है। इन फसलो से टिकाऊ आय संभव है। सरसों अनुसंधान संस्थान के निदेशक डॉ. विजयवीर सिंह ने यह बात कृषि प्रसार कार्यकर्ता प्रशिक्षण के समापन मौके पर कही। उन्होने कहा कि वर्तमान में खेती को लाभकारी बनाने के लिए ऐसी फसलों का चयन करना चाहिए, जिनकी बाजार में मांग निरंतर बनी रहती है। इससे किसानों को दीर्घकालिक आर्थिक स्थिरता मिल सके। मसालों और औषधीय पौधों का क्षेत्र ऐसा उभरता हुआ क्षेत्र है जो किसानों को न केवल अतिरित्त आय देता है । बल्कि, कृषि क्षेत्र में मूल्य संवर्धन और निर्यात की संभावनाएँ भी बढ़ाता है। प्रशिक्षण समन्वयक डॉ. अशोक कुमार शर्मा ने बताया कि इस प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य मसालों और औषधीय पौधों की उन्नत उत्पादन तकनीक, पौध-जल -पोषक तत्व प्रबंधन, प्रसंस्करण और विपणन की नवीनतम विधियों से परिचित कराना था। प्रशिक्षण के दौरान अश्वगंधा, तुलसी, स्टीविया, हल्दी, सौंफ , धनिया, जीरा आदि फसलों के बारे में जानकारी दी गई। प्रशिक्षण में भरतपुर, डीग और करौली के कृषि प्रसार कार्यकर्ताओं ने भाग लिया।