130 गोदाम तैयार, 70 का निर्माण जारी, समीक्षा बैठक
(सभी तस्वीरें- हलधर)जयपुर। राजस्थान में किसानों की उपज के भंडारण और उन्हें सीधे बाजार से जोड़ने के लिए सहकारिता नेटवर्क का विस्तार किया जा रहा है। विश्व की सबसे बड़ी अन्न भंडारण योजना के तहत प्रदेश में 130 गोदामों का निर्माण पूरा हो चुका है, जबकि 70 गोदामों का काम जारी है। इनका उपयोग समर्थन मूल्य पर खरीदी गई उपज के साथ बीज, उर्वरक और राशन के अनाज के भंडारण में किया जा सकेगा।
मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने शासन सचिवालय में सहकारिता विभाग की योजनाओं की समीक्षा करते हुए तैयार गोदामों का संचालन समय पर शुरू करने के निर्देश दिए। उन्होंने सोजत की मेहंदी, बारां के चावल, नागौर की मैथी-जीरा और मथानिया की मिर्च जैसे क्षेत्र विशेष के उत्पादों को विदेशी बाजारों तक पहुंचाने की संभावनाएं तलाशने को भी कहा।
शासन सचिव सहकारिता डॉ. समित शर्मा ने बताया कि प्रदेश में सहकारी समितियों के जरिए 1,575 कृषि यंत्र किराया केंद्र संचालित हैं। यहां छोटे और सीमांत किसानों को ट्रैक्टर, रोटावेटर, थ्रेशर और बुवाई के यंत्र किराये पर मिलते हैं। 30 लाख रुपए लागत वाले ऐसे केंद्र की स्थापना पर 80 प्रतिशत तक अनुदान का प्रावधान है।
बीज कारोबार में बढ़ोतरी
प्रदेश में सहकारी बीज कारोबार में भी तेज बढ़ोतरी हुई है। भारतीय बीज सहकारी समिति लिमिटेड का राजस्थान में कारोबार वर्ष 2024-25 के 2.34 करोड़ रुपए से बढ़कर 2025-26 में 24.28 करोड़ रुपए हो गया। वहीं श्रीगंगानगर की अतुल्य ग्रामीण सहकारी समिति ने राष्ट्रीय सहकारी निर्यात लिमिटेड के सहयोग से 2025 में संयुक्त अरब अमीरात को बाजरे के दो कंटेनर निर्यात किए।
कई फसलो पर चर्चा
बैठक में बाजरा, जीरा और किन्नू के निर्यात के लिए संग्रहण, छंटाई, प्रसंस्करण और गुणवत्ता जांच की सुविधाएं मजबूत करने पर भी चर्चा हुई।