खाद के साथ दूसरा सामान जबरन बेचा तो लाइसेंस होगा रद्द, FIR भी होगी

नई दिल्ली 26-Oct-2026 06:26 PM

खाद के साथ दूसरा सामान जबरन बेचा तो लाइसेंस होगा रद्द, FIR भी होगी

(सभी तस्वीरें- हलधर)

जयपुर। राजस्थान में किसानों को यूरिया-डीएपी के साथ जिंक, सल्फर, कीटनाशक, जैव उर्वरक या दूसरा कृषि उत्पाद जबरन बेचने वाले दुकानदारों पर अब लाइसेंस रद्द करने से लेकर एफआईआर तक की कार्रवाई हो सकेगी। कृषि विभाग ने जबरन टैगिंग, खाद की कालाबाजारी और तय कीमत से ज्यादा वसूली के खिलाफ प्रदेशभर में निगरानी तेज कर दी है। अनियमितता में थोक विक्रेता या उर्वरक कंपनी की भूमिका सामने आई तो उन्हें भी जांच के दायरे में लिया जाएगा। कृषि विभाग के अनुसार विक्रेताओं की निगरानी के लिए विकसित मोबाइल ऐप के जरिए अब तक प्रदेश में 9 हजार से ज्यादा कृषि आदान विक्रेताओं का निरीक्षण किया जा चुका है। अनियमितताएं मिलने पर 250 से अधिक विक्रेताओं के खिलाफ कार्रवाई की गई है।

कृषि आयुक्तालय ने 23 अक्टूबर को जारी निर्देशों में साफ किया है कि किसान को अनुदानित यूरिया, डीएपी या अन्य उर्वरक खरीदने के लिए किसी दूसरे उत्पाद की खरीद की शर्त नहीं लगाई जा सकती। ऐसा मिलने पर उर्वरक नियंत्रण आदेश-1985 और आवश्यक वस्तु अधिनियम-1955 के प्रावधानों के तहत विक्रय प्राधिकार-पत्र निलंबित या निरस्त करने के साथ गंभीर मामलों में एफआईआर भी दर्ज कराई जा सकेगी।

गोदाम से दुकान तक औचक जांच

सभी जिलों में विशेष निरीक्षण दल बनाकर उर्वरक कंपनियों, गोदामों और थोक-खुदरा विक्रेताओं की नियमित व औचक जांच के निर्देश दिए गए हैं। टीम खाद का वास्तविक स्टॉक, बिक्री रिकॉर्ड, बिल और दूसरे कृषि उत्पादों की खरीद-बिक्री से जुड़े दस्तावेज भी जांचेगी।

शिकायत मिली तो 24 घंटे में कार्रवाई शुरू

हर जिले में उर्वरक शिकायत प्रकोष्ठ या हेल्पलाइन स्थापित करने के निर्देश दिए गए हैं। जबरन टैगिंग, अधिक कीमत वसूली या दूसरी गड़बड़ी की शिकायत मिलने पर 24 घंटे के भीतर प्रारंभिक कार्रवाई शुरू करनी होगी। कार्रवाई में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों की भी जिम्मेदारी तय की जाएगी।

किसानों के लिए जरूरी

कृषि विभाग ने किसानों से कहा है कि दुकानदार यूरिया-डीएपी के साथ कोई अन्य उत्पाद खरीदने का दबाव बनाए, निर्धारित कीमत से अधिक राशि मांगे या खाद की कालाबाजारी करे तो इसकी शिकायत जिला कृषि कार्यालय में करें। विभाग ने स्पष्ट किया है कि खाद के नाम पर किसानों का आर्थिक शोषण करने वालों के खिलाफ अभियान लगातार जारी रहेगा।


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