राजस्थान में सरसों की बुवाई ने पकड़ी रफ्तार, चने की फसल भी तैयार
(सभी तस्वीरें- हलधर)जयपुर। प्रदेश में रबी फसल खेतों में अपनी चमक बिखरेने लगी है। किसान सरसों और चना फसल की बुवाई शुरू कर चुके है। वहीं, अगेती बुवाई की गई फसल खेतों में हरियाली बिखरने लगी है। हालांकि, सरसों बुवाई का अभी ज्यादा नहीं हुई है। लेकिन, समय के साथ कृषि विभाग का बुवाई आंकड़ा बढ़ता नजर आ रहा है। कृषि विभाग के मुताबिक साढे पांच लाख हैक्टयर क्षेत्र में सरसों की बुवाई हो चुकी है। गौरतलब है कि पिछले दिनों हुई बेमौसमी बरसात से खेतों में कटी फसलों का काफी नुकसान पहुंचा है। बारिश से ना केवल खेतों में कटकर पड़ी फसल भिग गई है। बल्कि, मंडियों में बिक्री के लिए आई जिंस भी तेज बारिश से बह निकली। इससे किसानों को खास नुकसान उठाना पड़ा है। कृषि वैज्ञानिको का कहना है कि किसान नवम्बर प्रथम सप्ताह तक सरसों की बुवाई कर सकेंगे। इसके बाद बुवाई करने पर अपेक्षित उत्पादन नहीं मिल पायेगा। गौरतलब है कि किसानों को इन दिनों डीएपी की किल्लत का सामना भी करना पड़ रहा है। कई जिलों में खाद लेने के लिए लंबी कतारे देखने को मिल रही है। हालांकि, सरकार पर्याप्त मात्रा में खाद की उपलब्धता बता रही है। लेकिन, किसान डीएपी के लिए क्यों हलकान है, इस बात का जवाब कृषि अधिकारियों के पास नही है। फिलहाल किसान एसएसपी सहित दूसरे सहायक उर्वरकों का प्रयोग करके समय पर रबी फसलों की बुवाई सम्पन्न करने में जुटे है। कृषि विभाग की माने तो दीपावली बाद से जल्द ही जीरा, ईसबगोल सहित दूसरी मसाला फसलों की बुवाई किसान शुरू कर देंगे। इन दिनों किसान सरसों की बुवाई पर फोकस किए हुए है। गौरतलब है कि प्रदेश में एक करोड़ 20 लाख हैक्टयर क्षेत्र में रबी फसलों की बुवाई होनी है। कृषि विभाग के अधिकारियों का कहना है कि मौसम शुष्क होने से अब सरसों के बुवाई क्षेत्र तेजी से बढ़ रहा है। बारानी क्षेत्रों के किसान तेजी से सरसों की बुवाई में जुटे हुए है।
सुबह -शाम गुलाबी ठंडक
पश्चिमी विक्षोभ के असर के चलते वायुमंडल में नमी आने के कारण सुबह शाम ठंडी हवाएं चल रही है, जिसके कारण सुबह -शाम गुलाबी ठंडक का अहसास हो रहा है। हवा में नमी के कारण तापमान में लगातार गिरावट आ रही है। जयपुर मौसम केंद्र के अनुसार पश्चिमी विक्षोभ का असर खत्म होने के साथ ही बारिश की गतिविधियों मेें कमी आयेगी।
पेन्टेड बग कीट नियंत्रण
सरसों फसल में पेन्टेड बग कीट नियंत्रण के लिए थायोमिथेक्साम 30 एफ.एस. 5.0 ग्राम अथवा इमिडाक्लोपिड 48 एफ.एस. 6.0 ग्राम प्रति किलो बीज की दर से बीजोपचार कर बुवाई करना प्रभावी रहता है। पेन्टेड बग और आरामक्खी कीट की रोकथाम के लिए क्यूनालफॉस 1.5 प्रतिशत अथवा मैलाथियॉन 5 प्रतिशत अथवा कारबेरिल 5 प्रतिशत चूर्ण 20-25 किलो प्रति हैक्टयर की दर से प्रात: अथवा सांयंकाल भुरकाव लाभदायक रहता है।
यह करें ईसबगोल उत्पादक
प्रदेश में जीरा और ईसबगोल फसल की बुवाई अभी शुरू नहीं हुई है। लेकिन, उत्पादक किसानों के सामने डीएपी की कमी आड़े आने की संभावना है। इस स्थिति को देखते हुए कृषि विज्ञान केन्द्र, गुडामालानी ने किसानों को एसएसपी उपयोग की सलाह दी है। केन्द्र के प्रभारी वैज्ञानिक डॉ. प्रदीप पगारिया ने बताया कि यदि एनपीके की पूर्ति यूरिया, एसएसपी और एमओपी खाद से करनी हो तो किसान प्रति हैक्टयर 65.22 किग्रा, एसएसपी 125 कि ग्रा. और एमओपी 25 कि ग्रा की दर से उपयोग करें।
सल्फर से तेल और प्रोटीन
एसएसपी से 16.5 किग्रा अतिरिक्तसल्फर मिलता है। इससे सरसों में तेल की मात्रा और चने में प्रोटीन-विटामिन की मात्रा बढ़ जाती है। इससे फसल की गुणवत्ता और उत्पादन दोनों में सुधार होता है। बुवाई के समय उर्वरक को हमेशा कतारों में डालें, खड़ी फसलों में सिफारिश अनुसार यूरिया छिटकें। उर्वरकों का उपयोग मृदा स्वास्थ्य कार्ड की सिफारिश अनुसार करें। 1बैग डीएपी की कीमत में 3 बैग एसएसपी खरीदे जा सकते हैं। 2 बैग एसएसपी से मिलने वाले पोषक तत्वों का मूल्य लगभग 1900 होता है। जबकि 1 बैग डीएपी की कीमत 1350 रूपए है।
बुवाई एक नजर
गेहूं- 10 हजार
चना-36 हजार
सरसों-5.50 लाख