35 करोड़ पशुओं का बनेगा ‘आधार’, बीमारी से टीकाकरण तक डिजिटल होगा रिकॉर्ड

नई दिल्ली 26-Oct-2026 05:36 PM

35 करोड़ पशुओं का बनेगा ‘आधार’, बीमारी से टीकाकरण तक डिजिटल होगा रिकॉर्ड

(सभी तस्वीरें- हलधर)

जयपुर। इंसानों की तरह अब पशुओं की भी डिजिटल पहचान उनके इलाज में अहम भूमिका निभाएगी। देश में 35 करोड़ से ज्यादा पशुओं को 12 अंकों की विशिष्ट ‘पशु आधार’ पहचान दी जा रही है। इससे पशु की पहचान के साथ उसका स्वास्थ्य रिकॉर्ड और टीकाकरण की जानकारी डिजिटल रूप से दर्ज रहेगी। पशुपालकों और पशु चिकित्सकों को बीमारी की निगरानी व उपचार में इससे मदद मिल सकेगी।

राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने  राजस्थान पशु चिकित्सा और पशु विज्ञान विश्वविद्यालय, जोबनेर में ‘वेटनरी मेडिसन इन दी डिजिटल ऐरा’ विषयक राष्ट्रीय सिम्पोजियम में यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि राजस्थान दुग्ध उत्पादन में देश में दूसरे स्थान पर है। अब पशु चिकित्सा और पशुधन संरक्षण में भी प्रदेश को अग्रणी बनाने की जरूरत है। बागडे ने कहा कि पशु अपनी बीमारी और पीड़ा बता नहीं सकते, इसलिए उनका रोग निदान इंसानों के मुकाबले अधिक चुनौतीपूर्ण है। ऐसे में पशु चिकित्सकों को परंपरागत उपचार के साथ आधुनिक तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उपयोग बढ़ाना होगा।

उन्होंने राठी और थारपारकर जैसी राजस्थान की देशी नस्लों को महत्वपूर्ण बताते हुए पशुओं के संतुलित आहार, बेहतर स्वास्थ्य, नस्ल सुधार और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने पर जोर दिया।

पशुपालकों को क्या फायदा?

‘पशु आधार’ से पशु की अलग डिजिटल पहचान बनेगी। स्वास्थ्य और टीकाकरण का रिकॉर्ड उपलब्ध रहने से पशु चिकित्सकों को उसकी पिछली स्वास्थ्य स्थिति समझने में मदद मिलेगी। इसका फायदा विशेष रूप से छोटे किसानों और पशुपालकों को बेहतर पशु स्वास्थ्य प्रबंधन के रूप में मिल सकता है।

दूध से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को ताकत

राज्यपाल ने कहा कि प्रदेश के दुग्ध उत्पादन में छोटे किसानों और पशुपालकों की बड़ी भागीदारी है। वैज्ञानिक पशुपालन, संतुलित आहार और बेहतर चिकित्सा सुविधाओं से दूध उत्पादन बढ़ाने के साथ पशुपालकों की आमदनी मजबूत की जा सकती है।

सिम्पोजियम में पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वालों को सम्मानित किया गया। कुलगुरु प्रो. त्रिभुवन शर्मा ने कार्यक्रम की जानकारी दी।


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