कम बारिश से खेतों की नमी घटी, रबी बुवाई पर संकट बढ़ा

नई दिल्ली 29-Sep-2026 01:11 PM

कम बारिश से खेतों की नमी घटी, रबी बुवाई पर संकट बढ़ा

(सभी तस्वीरें- हलधर)

जयपुर। प्रदेश में इस साल मानसून की कमजोर चाल ने खेती-किसानी की चिंता बढ़ा दी है। मानसून के अंतिम चरण में भी बारिश की कमी रहने से बरानी खेती करने वाले किसानों के सामने रबी फसल बुवाई का संकट गहराता नजर आने लगा है। गौरतलब है कि प्रदेश के कई जिलों से मानसूनी की विदाई हो चुकी है। साथ ही, पश्चिमी जिलों में तापामान 40 डिग्री सेल्सियस तक दर्ज हो रहा है। ऐसे में उन किसानों के सामने संकट गहरा गया है कि जो पूरी तरह बारिश पर निर्भर है। उनके सामने खेतों में पर्याप्त नमी बनाए रखने की चुनौती है। वहीं, जिन क्षेत्रों में सिंचाई की सुविधा उपलब्ध है, वहां भी जलस्रोतों में पानी की उपलब्धता अनुमान से कम है। क्योंकि, इस साल प्रदेश में औसत से कम बारिश हुई है। किसानों का कहना ै है कि बारिश की कमी का असर खेतों में मौजूद नमी, रबी बुवाई और फसलों के शुरुआती विकास पर पडऩे की आशंका है। मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2026 के मानसून सीजन में 19 सितंबर तक राजस्थान में सामान्य से करीब 15 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई। वहीं, वर्ष 2025 में जून से सितंबर के मानसून सीजन के दौरान प्रदेश में 715.2 मिलीमीटर बारिश दर्ज हुई थी, जो सामान्य 435.6 मिलीमीटर से करीब 64 प्रतिशत अधिक थी। इस तरह पिछले साल प्रदेश में जहां सामान्य से काफी अधिक बारिश हुई थी।  वहीं इस साल मानसून की बारिश में कमी ने कृषि क्षेत्र के सामने नई चुनौतियां खड़ी कर दी हैं। इससे रबी मौसम में फसल बुवाई का क्षेत्रफल घटने की संभावना बनती दिखाई देने लगी है। हालांकि, अभी कृषि विभाग ने रबी फसल बुवाई क्षेत्र को लेकर कोई अधिकारिक आंक ड़े जारी नहीं किए है। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि अक्टूबर के महीने में एक बारिश हो जाएं तो जमीन में नमी की चुनौति काफी हद तक कम हो जायेगी।

बदले हालात, किसानों की बढ़ी चिंता

पिछले साल प्रदेश के अधिकांश जिलों में मानसून की अच्छी बारिश हुई थी। मौसम विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक, 2025 में राजस्थान के 33 जिलों में से 20 में सामान्य से बहुत अधिक और 12 जिलों में सामान्य से अधिक बारिश दर्ज की गई थी। इसके उलट, इस साल मानसून की बारिश में कमी और लंबे शुष्क दौर ने खेती के लिए उपलब्ध नमी को लेकर चिंता बढ़ाई है।

पर्याप्त नमी की चुनौती

गौरतलब है कि प्रदेश में बड़ी संख्या में ऐसे किसान है, जो बारिश पर निर्भर है। इन क्षेत्रों में मिट्टी में मौजूद नमी ही रबी फसलों की बुवाई और शुरुआती बढ़वार का प्रमुख आधार होती है। मानसून की बारिश कम होने से खेतों में नमी का स्तर घटने की आशंका है। ऐसे में सरसों, चना और जौ जैसी रबी फसलों की समय पर बुवाई प्रभावित हो सकती है। खासकर उन क्षेत्रों में समस्या अधिक हो सकती है, जहां बारिश के बाद खेतों में पानी ठहरने और मिट्टी में नमी संरक्षित रहने की क्षमता कम है। कृषि विशेषज्ञ डॉ. वीएस यादव ने बताया कि रबी फसलों की बुवाई से पहले खेत में पर्याप्त नमी होना जरूरी है। यदि बुवाई के समय मिट्टी सूखी रहती है तो बीजों के अंकुरण में परेशानी आ सकती है। इससे किसानों को बुवाई टालने या उपलब्ध नमी के अनुसार फसल और किस्म का चयन करने की जरूरत है।

सिंचाई पानी बड़ी समस्या

कम मानसूनी बारिश का असर केवल बरानी खेती तक सीमित नहीं रह सकता। जिन किसानों के पास सिंचाई की सुविधा है, उन्हें भी पानी की उपलब्धता के अनुसार फसल प्रबंधन करने की आवश्कता है। कुओं, ट्यूबवेल और अन्य जलस्रोतों पर निर्भर किसानों के लिए पानी की मांग बढऩे पर सिंचाई का खर्च भी बढ़ सकता है। वही, जिन क्षेत्रों में जलाशयों और भूजल का पुनर्भरण कम हुआ है, वहां रबी सीजन के दौरान सिंचाई की व्यवस्था चुनौतीपूर्ण हो सकती है। विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसी परिस्थितियों में खेत की नमी को संरक्षित रखना, उपलब्ध पानी का आवश्यकतानुसार उपयोग करना और स्थानीय कृषि विभाग की सलाह के आधार पर बुवाई करना महत्वपूर्ण है।

विदाई के साथ रबी की तैयारी

20 सितंबर को पश्चिमी राजस्थान के कुछ हिस्सों से मानसून की विदाई शुरू हो गई थी। मौसम विभाग के अनुसार, मानसून की वापसी के दौरान प्रदेश में बारिश की कमी करीब 15 प्रतिशत थी। ऐसे में किसान स्थानीय परिस्थिति के आधार पर ही फसल का चयन करें। 


ट्रेंडिंग ख़बरें