राजस्थान में सूखे की मार से फसलें बर्बाद, चारे के दाम आसमान पर 

नई दिल्ली 12-Oct-2026 04:21 PM

राजस्थान में सूखे की मार से फसलें बर्बाद, चारे के दाम आसमान पर 

(सभी तस्वीरें- हलधर)

जयपुर। प्रदेश में मानसून की बेरुखी ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था के सामने गंभीर चुनौतियां खड़ी कर दी हैं। कहीं खेतों में फसल की पैदावार को लेकर चिंता है, तो कहीं पशुओं के लिए चारे और पेयजल की उपलब्धता बड़ा सवाल बनती जा रही है। पश्चिमी राजस्थान के बाड़मेर, जैसलमेर, बालोतरा और आसपास के क्षेत्रों से सूखे जैसे हालात की चिंताएं सामने आ रही हैं। अब सवाल केवल कम बारिश का नहीं, बल्कि आने वाले महीनों में किसानों, पशुपालकों और ग्रामीण परिवारों को संभावित संकट से बचाने का है। भारतीय मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2026 के मानसून सीजन में राजस्थान में सामान्य 424.71 मिलीमीटर के मुकाबले 350.49 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई। यह सामान्य से 17.33 प्रतिशत कम है। करीब 41 जिलों में से 17 जिलों में बारिश की कमी दर्ज की गई। पाली, जैसलमेर और जालोर में स्थिति विशेष रूप से चिंताजनक रही। बारिश के आंकड़े प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में असमान स्थिति की तस्वीर पेश कर रहे हैं। पाली में सामान्य से 58.44 प्रतिशत, जैसलमेर में 54.17 प्रतिशत और जालोर में 50.26 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई। बांसवाड़ा में भी 39.07 प्रतिशत और हनुमानगढ़ में 38.02 प्रतिशत की कमी रही।

यह जिले सूखे की चपेट

सूखे की मार सबसे अधिक पश्चिमी राजस्थान के नौ और मध्य राजस्थान के तीन जिलों सहित कुल 17 जिलों पर पड़ी है। इन इलाकों के अधिकतर हिस्सों में सामान्य से 33 प्रतिशत बारिश भी नहीं हुई है। अत्यधिक प्रभावित क्षेत्रों में बाड़मेर के 2,460 गांव, जोधपुर के 1,838 गांव, नागौर के 1,589 गांव और जयपुर के 1,400 गांव शामिल हैं। इसके अलावा बालोतरा के 1,216 गांव, जालोर के 1,117 गांव, अजमेर के 1,134 गांव, पाली के 1,030 गांव, फलोदी के 1,064 गांव, जैसलमेर के 961 गांव, चूरू के 934 गांव, बीकानेर के 919 गांव, ब्यावर के 787 गांव और सिरोही के 530 गांव अकाल की चपेट में हैं।

राहत कार्यों के लिए पहला कदम

आपदा प्रबंधन, जलदाय, जल संसाधन और ग्रामीण विकास विभागों के अधिकारी मिलकर इस संकट से निपटने के लिए एक्शन प्लान तैयार कर रहे हैं। सरकार ने पेयजल संकट दूर करने के लिए 650 वाहन और 3,200 श्रमिक तैनात किए हैं। बंद पड़े हैंडपंपों की तत्काल मरम्मत के लिए 150 वाहनों की स्वीकृति दी गई है। स्थानीय स्तर पर त्वरित कार्यवाही के लिए जिला कलेक्टर को आपातकालीन मद से 75 लाख रुपये तक खर्च करने का अधिकार दिया गया है। साथ ही जिला कलेक्टर अपने स्तर पर जल व्यवस्था के लिए 25 लाख रुपये स्वीकृत कर सकते हैं।

दोहरी चुनौती से जूझता किसान

कम बारिश का असर खेत में खड़ी फसल से लेकर रबी फसल तक पहुंचता नजर आ रहा है। बाजरा, ग्वार, मूंग, मोठ और अन्य खरीफ फसलों का उत्पादन आधा से ज्यादा घट चुका है। वहीं, तापमान बढने से जमीनी नमी कम हो रही है। ऐसे में रबी फसल बुवाई की उम्मीदें भी सूखती नजर आ रही है।

चारे का संकट

कम बारिश के कारण चारे का उत्पादन प्रभावित होने की आशंका है। ऐसे में पशुओं के लिए पर्याप्त चारा जुटाना छोटे पशुपालकों के लिए महंगा पड़ सकता है। किसानों के मुताबिक सूखा प्रभावित जिलों में चारे के दाम बढक़र 1200 रूपए प्रति मण तक पहुंच चुके है। हालांकि, सरकार मध्यप्रदेश-हरियाणा-पंजाब जैसे राज्यों से चारा आपूर्ति के प्रयास कर रही है। लेकिन, फिलहाल किसानों के सामने संकट खड़ा है।

पेयजल पर दबाव

बाड़मेर और जैसलमेर के कम वर्षा वाले क्षेत्रों में पेयजल की समस्या को देखते हुए राज्य सरकार ने टैंकरों के माध्यम से पानी की आपूर्ति 31 दिसंबर 2026 तक जारी रखने की घोषणा की है। साथ ही, जिला कलक्टरों को एक करोड़ रुपये तक के आवश्यक राहत और आकस्मिक कार्य स्वीकृत करने का अधिकार दिया गया है।

सियासत भी तेज

प्रदेश के कुछ हिस्सों में सूखे जैसे हालात को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हुई है। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने सरकार से पेयजल, पशुचारे और रोजगार की व्यवस्था के लिए आकस्मिक योजना तैयार करने की मांग की थी। उन्होंने पश्चिमी राजस्थान के कई जिलों के गांवों में हालात चिंताजनक होने का दावा किया। 


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