MSP पर संकट के बादल, बहिष्कार से लेकर आंदोलन तक की चेतावनी
(सभी तस्वीरें- हलधर)जयपुर। समर्थन मूल्य पर रबी फसलों की खरीद शुरू होने से पूर्व ही संकट गहराने लगा है। पिछले 6 सालों के कमीशन बकाया भुगतान की मांग को लेकर राजस्थान सहकारी कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, जयपुर ने खरीद बहिष्कार का ऐलान कर दिया है। समिति का कहना है कि राजफैड के द्वारा वर्ष 2020 से प्रति क्विंटल तय कमीशन का भुगतान सहकारी समितियों और खरीद उपकेन्द्रो को नहीं किया गया है। इसके चलते समितियां आर्थिक तंगी से जूझ रही है। समिति के प्रदेशाध्यक्ष हनुमान सिंह राजावत ने बताया कि कमीशन का भुगतान होने तक खरीद संबंधी कोई भी कार्य शुरू नहीं किया जायेगा। गौरतलब है कि प्रदेश के कोटा, अजमेर, भरतपुर, श्रीगंगानगर के क्षेत्रीय कार्यालयों के द्वारा 25 मार्च से फसल खरीद शुरू होनी है। जबकि, जयपुर, जोधपुर, उदयपुर, बीकानेर क्षेत्रीय कार्यालयों द्वारा अप्रैल से खरीद शुरू होगी। उन्होने बताया कि खरीद शुरू होने से पूर्व कमीशन का भुगतान नहीं हुआ तो आंदोलन शुरू किया जायेगा।
गोदाम रह सकते है खाली
उधर, सरकारी खरीद की तैयारियां शुरू होने के साथ ही बाजार में सरसों और चना के भाव में तेजी दर्ज होने लगी है। मंडियों में हाई क्वालिटी सरसों के भाव 6400-6800 रूपए प्रति क्ंिवटल तक बोले जा रहे है। जबकि, समर्थन मूल्य 6 हजार 200 रुपये घोषित किया है। बता दें कि समर्थन मूल्य पर 13.78 लाख क्विंटल सरसों खरीद का लक्ष्य रखा गया है। जबकि, चना और गेहूं के भाव एमएसपी के करीब बने हुए है। गौरतलब है कि अब प्रति किसान 25 क्विंटल प्रति हैक्टयर की बजाय अधिकतम 12 क्विंटल प्रति हैक्टयर उपज की ही खरीद की जाएगी। इससे भी किसान सरकारी प्रक्रिया से बचना चाहेंगे।
दो साल से पिछड़ रही है खरीद
रबी 2024 में सरसों की खरीद का लक्ष्य 14. 61 लाख मीट्रिक टन से अधिक रखा गया था। लेकिन, वास्तविक खरीद करीब 3.51 लाख मीट्रिक टन ही हो सकी। वहीं चना की स्थिति और खराब रही। जहां 4 लाख 52 हजार मीट्रिक टन के लक्ष्य के मुकाबले महज 1252 मीट्रिक टन खरीद ही हो पाई। हालांकि, गेहूं की खरीद अपेक्षाकृत बेहतर रही, लेकिन लक्ष्य का 60 प्रतिशत ही खरीदा जा सका। सरकार ने गेहूं की खरीद का लक्ष्य 20 लाख मीट्रिक टन रखा, जिसके मुकाबले 12 लाख मीट्रिक टन से अधिक खरीद की गई। इसी प्रकार रबी 2025 में सरसों का लक्ष्य 13 लाख 22 हजार मीट्रिक टन रखा गया। लेकिन, खरीद केवल 70 हजार मीट्रिक टन के आसपास ही रही। चना की खरीद भी 5.46 लाख मीट्रिक टन के लक्ष्य की तुलना में मात्र 54 हजार मीट्रिक टन की गई।
नई गाइडलाइन जारी
समर्थन मूल्य ( एमएसपी ) पर चना और सरसों बेचने पर किसानों को पटवारियों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे । वजह खरीद प्रक्रिया के दौरान फर्जी गिरदावरी को लेकर इस बार सरकार ने नई गाइडलाइन जारी की है । गाइडलाइन के अनुसार इस बार उपज के लिए जमीन का खाता नम्बर दर्ज करते ही ऑनलाइन गिरदावरी उपलब्ध हो जाएगी । फर्जी गिरदावरी पर अंकुश लगाने और खरीद प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से यह कदम उठाया गया है ।