राजुवास के डिप्लोमा कोर्स पर सवाल, अधर-झूल में सैंकड़ों छात्रों का भविष्य

नई दिल्ली 23-Mar-2026 06:51 PM

राजुवास के डिप्लोमा कोर्स पर सवाल, अधर-झूल में सैंकड़ों छात्रों का भविष्य

(सभी तस्वीरें- हलधर)

जयपुर। रेवडिय़ों के बदले निजी विश्वविद्यालयों द्वारा फर्जी डिग्रियां बांटने के कई मामले देश-प्रदेश में समाने आ चुके है। लेकिन, जब सरकारी विश्वविद्यालय ही फर्जी डिप्लोमा बांटना शुरू कर दें तो स्थिति कुएं में भांग जैसी नजर आती है। कुछ ऐसा ही मामला सामने आया है राजस्थान पशु चिकित्सा और पशु विज्ञान विश्वविद्यालय, बीकानेर में। यहां द्विवर्षीय एएचडीपी पाठ्यक्रम पशुपलान विभाग की एनओसी के बिना संचालित किया जा रहा है। ऐसे में डिप्लोमा की मान्यता पर सवाल उठ खड़ा हुआ है। सूत्रों ने बताया कि पशुपालन विभाग से मान्यता नहीं मिलने के कारण कई अभ्यर्थियों को पशु कंपउंडर भर्ती में सफल होन के बाद पदस्थापन से वंचित कर दिया गया। वहीं, करीब 9 निजी संस्थानों के सैकड़ों विद्यार्थियों का भविष्य दाव पर लगा है। सबसे ज्यादा चिंता निजी संस्थानो से शिक्षा प्राप्त कर रहे छात्रों की है। क्योंकि, पशुपालन विभाग के एक्शन में आने के साथ ही उनके सामने इधर कुआं, इधर खाई जैसी स्थिति पैदा हो चुकी है। 

9 कॉलेजों के सैकड़ो छात्र

सूत्रों ने इन दिनों 9 निजी डिप्लोमा संस्थानों का मामला सुर्खियां बटोर रहा है। मसला ये है कि इन सभी संस्थानों ने राजुवास बीकानेर से सम्बद्धता प्राप्त की हुई है। लेकिन, राज्य सरकार यानी पशुपालन विभाग से इनको मान्यता नहीं मिली है। ऐसे में विश्वविद्यालय द्वारा जारी डिप्लोमा स्वत: ही फर्जी होने के कगार पर पहुंच चुका है। हालांकि, मामला न्यायालय में विचारधी है। जिसमें अप्रैल माह में अगली सुनवाई होनी है। हालांकि, न्यायालय ने राहत के तौर पर विद्यार्थियों को सरकारी डिप्लोमा संस्थान में स्थानान्तरित करने के निर्देश दिए है। 

राजभवन पर भी आंच

सूत्रों ने बताया कि प्रदेश की पूर्ववर्ती सरकार के समय सीकर, जयपुर, करौली आदि जिलों में करीब 9 निजी डिप्लोमा संस्थानों को मंजूरी दी गई। मजेदार बात यह है कि संस्थान खोलने मेंं नियमों का पालन नहीं किया गया। पशुपालन विभाग से एनओसी प्राप्त किए बिना ही इन संस्थानों को राजूवास बीकानेर से सम्बद्ध कर दिया गया। सीटों का आंवटन कर विद्यार्थियों को प्रवेश दिया गया। लेकिन, अब मामले में पेच फंस चुका है। सूत्रो ने बताया कि राजुवास से सम्बद्धता का सारा खेल राजभव से चला, जो अब विद्यार्थियों के लिए गलफांस बन चुका है। 

सवाल सरकारी का भी

सूत्रों ने बताया कि निजी डिप्लोमा संस्थानों के साथ-साथ राजुवास के अधीन संचालित 10 डिप्लोमा संस्थानों का भी है। हालांकि, इन संस्थानों से पासआउट होने वालों के डिप्लोमा पर कोई संकट नहीं है। लेकिन, विश्वविद्यालय के डग, चांधन, नवानिया, पीजीआईवीईआर, कोटा, नोहर, जोधपुर के डिप्लोमा संस्थानों को भी कथित तौर पर बिना पशुपालन विभाग की एनओसी के संचालित किया जा रहा है। 

डिप्लोमा संस्थान के लिए पशुपालन विभाग से एनओसी अनिवार्य है। निजी डिप्लोमा संस्थानों को बिना एनओसी विश्वविद्यालय से सम्बद्धता कैसे मिली, इसकी जांच करवाई जा रही है। 

डॉ. बीएल श्रृंगी, डीन फैकल्टी चेयरमैन, राजुवास, बीकानेर


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