सरकार के इस तकनीकी नवाचार का आपने फायदा उठाया क्या?

नई दिल्ली 17-Nov-2025 06:30 PM

सरकार के इस तकनीकी नवाचार का आपने फायदा उठाया क्या?

(सभी तस्वीरें- हलधर)

राजस्थान में राज्य सरकार के तकनीकी नवाचार का हजारों किसान और पशुपालक फायदा उठा रहे हैं। प्रदेश के पशुपालन विभाग ने तकनीकी नवाचार की दिशा में एक ऐतिहासिक निर्णय लिया था, जिसका लाभ अब पशुपालकों को​ मिल रहा है। विभाग ने बीमार पशुओं के उपचार हेतु ‘चैटबॉट प्रणाली’ की शुरुआत कीं। सरकार की इस अनूठी पहल से राज्य के पशुपालक अब अपने पशुओं की बीमारी, लक्षण और संबंधित समस्याओं की जानकारी सीधे विभाग के पशु विशेषज्ञ चिकित्सकों तक पहुचा रहे हैं। इससे उन्हें त्वरित चिकित्सा परामर्श प्राप्त हो रहा है। आंकड़ों के अनुसार, पिछले छः महीने के दौरान प्रदेश में 82,713 पशुपालक इस माध्यम से जुड़ कर सलाह ले चुके हैं। साथ ही 65,490 पशुओं को चिकित्सा सहायता दी जा चुकी है।

नवाचार की केंद्रीय राज्यमंत्री ने की सराहना 

केंद्रीय राज्यमंत्री एपी सिंह बघेल ने राजस्थान सरकार के इस नवाचार की सराहना की। साथ ही उन्होंने इसे अन्य राज्यों में विस्तारित करने योग्य भी बताया। बघेल ने राज्य सरकार के प्रयासों की सराहना करते हुए अन्य राज्यों के लिए भी चैटबॉट मॉडल को अपनाने की बात कही है। राज्य के पशुपालन मंत्री जोराराम कुमावत ने कहा कि राजस्थान सरकार ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ पशुपालन को मजबूत बनाने के लिए निरंतर प्रयासरत है। चैटबॉट जैसी तकनीकी पहलें पशुपालकों के जीवन में वास्तविक परिवर्तन ला रही हैं। हमारा लक्ष्य है कि हर पशुपालक को घर बैठे चिकित्सा सहायता उपलब्ध हो।

महाराष्ट्र भी अपनाएगा राजस्थान मॉडल

पशुपालन विभाग के सचिव डॉ. समित शर्मा ने बताया कि बताया कि महाराष्ट्र सरकार ने भी राजस्थान के 1962 चैटबॉट मॉडल की सराहना करते हुए इस मॉडल को अपनाने का निर्णय लिया है। इस संबंध में कृषि, पशुपालन, डेयरी डवलपमेंट एवं मत्स्य विभाग के उप सचिव एम.बी. माराले ने महाराष्ट्र में संचालित 1962 महापशुधन संजीवनी एप के माध्यम से, राजस्थान की तर्ज पर वाट्सएप चैटबॉट की सुविधा शुरू करने के निर्देश दिए हैं।

उपचार प्रक्रिया में तेजी, पशु मृत्यु दर हुई कम

राजस्थान पशुपालन विभाग के निदेशक डॉ. आनंद सेजरा ने बताया कि राज्य में चैटबॉट प्रणाली ने पशु उपचार सेवाओं को अधिक तेज, पारदर्शी और सुलभ बनाया है। इससे न केवल उपचार की प्रक्रिया में तेजी आई है, बल्कि पशु मृत्यु दर भी घटी है। चैटबॉट के माध्यम से ग्रामीण अंचलों से लेकर दूरस्थ क्षेत्रों तक के पशुपालक विभाग से सीधे संवाद कर पा रहे हैं। पशु चिकित्सक ऑनलाइन माध्यम से न केवल परामर्श दे रहे हैं, बल्कि जरूरत पड़ने पर संबंधित क्षेत्र के पशु चिकित्सालयों को तुरंत सूचना देकर इलाज की व्यवस्था भी कर रहे हैं।

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