यूरिया-डीएपी पर टैगिंग जारी, कृषि आयुक्त के आदेश फेल

नई दिल्ली 13-Jul-2026 03:59 PM

यूरिया-डीएपी पर टैगिंग जारी, कृषि आयुक्त के आदेश फेल

(सभी तस्वीरें- हलधर)

जयपुर। कौन सुनेगा, किसको सुनाएं, इसलिए, चुप रहते है...। गीत की यह पंक्ति सटीक साबित हो रही है किसानों के साथ-साथ उर्वरक  के छोटे विके्र ताओं पर। उनका कहना है कि यूरिया-डीएपी बैग के साथ टैंगिग की समस्या कोई सुनने को तैयार नहीं है। कृषि आयुक्त द्वारा जारी आदेश की दुहाई भी काम नहीं आ रही है। एक ओर सरकार जहरमुक्त खेती को प्रोत्साहित कर रही है। वहीं, सहकारी और निजी क्षेत्र की उर्वरक निर्माता कम्पनियां हमें टैंगिग लेने-देने को मजबूर कर रही है। इस कारण बड़ा आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। हिण्डौन के एक उर्वरक विके्रता ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि टैंगिग रोकने के लिए लिए जिम्मेदार विभाग की हमारी शिकायत सुनने को तैयार नहीं है। कहे किससे? ज्यादा कहते है तो हम पर ही कार्यवाही हो जाती है। यूरिया-डीएपी बैग के साथ टैंगिग बेचना हमारी मजबूरी हो चुकी है। ऐसे में समझा जा सकता है कि टैग उत्पाद खरीदने के लिए किसान ही नहीं, फुटकर उर्वरक विक्रेता भी मजबूर है। 

किसान को आर्थिक नुकसान

गौरतलब है कि सहाकारी समितियां में बिक्री हो रहे उर्वरक के साथ नैनो यूरिया और डीएपी की बोतल किसानों को थमाई जा रही है। वहीं, प्राईवेट सेक्टर में अल्ट्राजीन, जिंक जैसे उत्पाद किसानों को ऊंची दर पर बिक्री किए जा रह है। गौरतलब है कि इन टैग उत्पादों के कारण सहकारी संस्थाओ की वित्तीय स्थिति प्रभावित हो रही है। वहीं, किसानों के साथ-साथ फुटकर विकेे्रताओं को भी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।

ऐसे समझे चम्बल की दादागिरी

उन्होंने बताया कि चम्बल फर्टिलाइजर अपने यूरिया बैग के साथ खरपतवारनाशी अल्ट्राजीन का पैकेट टैग के रूप में दे रही है। बाजार में इसकी कीमत 300 रूपए प्रतिकिलो है। जबकि, कंपनी इसे 490 रूपए प्रति किलो के भाव से बिक्री कर रही है। जबकि, चम्बल खुद इस उत्पाद की विनिर्माता कंपनी नहीं है।  उन्होंने बताया कि एक यूरिया बैग पर 8-10 रूपए की बचत विके्रता को होती है। ऐसे में टैग उत्पाद का गोदाम में पड़े रहना सीधे तौर पर नुकसान का सौदा है। 

निर्माता कंपनियों से कौनसा रिश्ता

आखिर अधिकारी उर्वरक निर्माता कंपनियों से कौनसा रिश्ता निभा रहे है। किसानों को राहत के लिए, इस बात की जांच कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा को करने की जरूरत यहां दिखाई पड़ रही है। अन्यथा किसान यूरिया-डीएपी के मामले में ऐसे ही कंपनियों के हाथों का खिलौना बना रहेगा। 

आदेश का असर नहीं

बता दें कि किसानों की राहत देने के लिए पिछले दिनों ही कृषि आयुक्त नरेश कुमार गोयल ने उर्वरक वितरण चैनल से संबंधित लोगों को बैठक के दौरान यूरिया-डीएपी के साथ टैंगिग नहीं करने के लिए सख्त हिदायत दी थी। लेकिन, निर्माता कंपनियों पर जारी आदेश का फिलहाल कोई असर नजर नहीं आ रहा है। टैंगिग का धंधा धडल्ले से जारी है। 


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