हाड़ौती में ड्रेगन फ्रूट खेती का नवाचार, रिटायर्ड अधिकारी बने मिसाल
(सभी तस्वीरें- हलधर)
बिशनपुरा, कोटा। जिन किसानों को खेती में नवाचार करना होता है, वो किसी का इंतजार ना तो इंतजार करते है और ना ही मदद किसी मदद की उम्मीद करते है। आइए, आपसे रूबरू करवाते है, किसान डॉ. रणवीर सिंह जाट से। जिन्होंने हाड़ौती संभाग की धरती पर ड्रेगन को जगह दी है। उनका कहना है कि अभी पौधों से उत्पादन नहीं मिला है। लेकिन, संतोष है कि मैने आधुनिक तौर-तरीके से ड्रेगन फ्रूट का बगीचा स्थापित कर लिया है। पौधें तेजी से ग्रोथ कर रहे है। उम्मीद है कि पौधों से फल भी मिलेगा। बता दें कि डॉ. रणवीर सिंह सेवानिवृति के बाद खेती में नवाचार का रंग भर रहे है। वर्तमान में उनको परम्परागत फसलों से सालाना दो से ढ़ाई लाख रूपए की आमदनी मिल रही है। किसान रणवीर सिंह ने हलधर टाइम्स को बताया कि शिक्षा विभाग में संयुक्त निदेशक पद से रिटायर होने के बाद खेती को देखना शुरू किया है। उन्होंने बताा कि खेती में कुछ नया करने के लिए राजस्थान सहित उतराखंड़, मध्यप्रदेश ओर दक्षिणी भारत में कई जगह ड्रेगन फल की खेती को देखा। इन सब से अनुभव लेकर टी आकार का स्ट्रक्चर तैयार करवाया और आधा हैक्टयर जमीन में ऑर्गेनिक तरीके से ड्रेगन के पौधें लगा दिए। उन्होंने बताया कि पौधे अभी सालभर के नहीं हुए है। लेकिन, पौधों की तेजी से बढ़वार हो रही है। इससे उम्मीद है कि जून में शुरूआती फल पौधों पर नजर आयेंगे। उन्होंने बताया कि जमीन के इस टुकड़े में बेलदार सब्जी फसलों का भी उत्पादन ले रहा हूॅ। इनमें लौकी, तुरई, खीरा और कद्दू की फसल शामिल है। इन फसलों से अच्छा उत्पादन मिल रहा है। लेकिन, अभी सब्जी फसलों का व्यवसायिक उत्पादन नहीं ले रहा हूॅ। जो भी पैदा हो रहा है, उसको खेत पर आने -जाने वालों को दे देता हॅू।
परम्परागत से ढ़ाई लाख
उन्होंने बताया कि मेरे पास 22 बीघा जमीन है। सिंचाई के लिए ट्यूबवैल और नहरी पानी उपलब्ध है। विद्युत बचत के लिए सोलर उर्जा संयंत्र लगाया हुआ है। उन्होंने बताया कि परम्परागत फसलों में धान, सोयाबीन, सरसों और गेहूं का उत्पादन लेता हॅू। इन फसलों से खर्च निकालने के बाद सालाना ढ़ाई लाख रूपए की आमदनी मिल जाती है।
पशुपालन भी लाभकारी
उन्होंने बताया कि ऑर्गेनिक करने के लिए पशुधन का कुनबा भी बढ़ाया है। वर्तमान में मेरे पास 3 भैंस और चार गाय है। पशुओं से उत्पादित दुग्ध घर में काम आ जाता है। वहीं, पशु अपशिष्ट कम्पोस्ट खाद के रूपए में खेतों में काम आ रहा है।
स्टोरी इनपुट: एनबी मालव, उपनिदेशक उद्यान, कोटा