बाजार में कपास की रिकॉर्ड कीमत, पर क्यों नहीं मिल रहा किसानों को फायदा?

नई दिल्ली 14-May-2026 05:39 PM

बाजार में कपास की रिकॉर्ड कीमत, पर क्यों नहीं मिल रहा किसानों को फायदा?

(सभी तस्वीरें- हलधर)

राजस्थान में अपनी विशेष पहचान कायम कर चुकी बिलाड़ा कृषि उपज मंडी किसी एक उपज के कारोबार तक सीमित में न रहकर हर सीजन में अलग फसलों में रिकॉर्ड बना रही है। यहां अलग-अलग जिलों और गांवों से किसान अपनी फसले बेचने पहुंचते हैं। मंडी में व्यापारियों के मुताबिक कपास के भावों में हाल ही में तेजी नजर आई है। रुई खंडी में लगभग 10 हजार रुपये प्रति क्विंटल तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

अचानक से आई इस तेजी से जहां व्यापारियों को मुनाफा हुआ है, वहीं किसानों को सही भाव न मिलने से निराशा हुई है। सीजन के दौरान कपास के भाव 7500 से 8500 रुपए प्रति क्विंटल तक रहे। कई किसानों ने दो महीने तक इंतजार के बाद भी मनचाहे दाम नहीं मिलने पर 8000 प्रति क्विंटल के आसपास कपास बेचा।

युद्ध का असर दिख रहा बाजारों में

व्यापारियों के मुताबिक, अंतरराष्टीय परिस्थितियों और युद्ध जैसे हालात की वजह से वैश्विक बाजार में उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। जिसका सीधा असर कपास पर पड़ा है। कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी और पॉलिस्टर फाइबर से महंगे होने से सूती धागे और कपास की मांग बढ़ी है।  

अंतरराष्ट्रीय बाजार में कपास का भाव 72-74 सेंट प्रति पाउंड से बढ़कर 90-92 सेंट प्रति पाउंड तक पहुंच गया है । इससे एक खंडी कपास का भाव 52 हजार रुपए से बढ़कर लगभग 62 हजार रुपए तक पहुंच गया है । पिछले कुछ दिनों से लगातार तेजी बनी हुई है और भाव 8500 से 9000 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गए हैं । हालांकि इस तेजी का वास्तविक लाभ किसानों को नहीं मिल पा रहा है, क्योंकि ज्यादातर किसानों के पास अब बिक्री के लिए कपास का स्टॉक नहीं बचा है। इस फायदा उन व्यापरियों को मिल रहा है जिन्होंने पहले से भंडारण करके रखा हुआ था।


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