5 हजार प्रति क्विंटल में बिक रहा इस किसान का गेहूं, सालाना कमाई हुई 11 लाख
5 हजार प्रति क्विंटल में बिक रहा इस किसान का गेहूं, सालाना कमाई हुई 11 लाख
(सभी तस्वीरें- हलधर)
अवलेश्वर, भीलवाड़ा। व्यक्ति के अंदर यदि कुछ करने का जज्बा है तो ढलती उम्र भी आड़े नहीं आती है। ढ़लती उम्र में कृषि नवाचारों का जुनून रखने वाला किसान है गोपाल कुमावत। जिनके गेहूं 5 हजार रूपए प्रति क्विंटल की दर से बिक्री हो रहे है। उनका कहना है कि वर्ष 2017 के बाद से खेतों में किसी भी तरह के रसायन का उपयोग नहीं किया है। जो भी फसल तैयार हो रही है वों पूर्णत: प्राकृतिक है। बता दें कि प्राकृतिक खेती से किसान गोपाल सालाना 10-11 लाख रूपए की आमदनी प्राप्त कर रहे है। किसान गोपाल ने हलधर टाइम्स को बताया कि मेरे पास 22 बीघा जमीन है। वर्ष 2018 में अध्यापक पद से सेवानिवृत हुआ। इसके बाद से खेती में कुछ ना कुछ नया करने के प्रयास में जुटा हॅू। इससे आय भी बढ़ रही है और खेती का खर्च घट रहा है। उन्होंने बताया कि नौकरी के दौरान खेती पर ज्यादा फोकस नहीं रहा। लेकिन, अब खेतों को प्राकृतिक बनाने में जुटा हुआ हॅू। इसी का परिणाम है कि खेत में उत्पादित गेहूं 5 हजार रूपए प्रति क्विंटल के भाव से बिक्री हो रहे है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2017 से खेतों में किसी तरह के रसायन का उपयोग लेना बंद कर दिया था। फसल सुरक्षा के लिए कृषि वैज्ञानिको के मार्गदर्शन में जैव कीटनाशी तैयार करना शुरू किया। इससे कृषि लागत में काफी कमी आई है और फसल का उत्पादन ही नहीं, आय में भी बढ़ौत्तरी दर्ज हुई है। उन्होंने बताया कि परम्परागत फसलों में चना, अलसी, मेथी, जौ, सूरजमुखी, राजमा, काला तिल, रागी आदि फसल शामिल है। इन फसलों से सालाना 8-10 लाख रूपए की आमदनी मिल जाती है।
मिश्रित बागवानी की ओर
उन्होंने बताया कि खेत में मिश्रित फलदार पौधें लगाए हुए है। इससे भी सालाना लाख रूपए करीब आमदनी मिल जाती है। फलदार पौधों में पपीता, अमरूद, आंवला, चीकू, आम आदि फसल शामिल है।
सब्जी भी जैविक
उन्होंने बताया कि सब्जी फसलों में भी किसी तरह के कीटनाशी का उपयोग नहीं कर रहा हूॅ। खेत पर जैव कीटनाशी तैयार करने के लिए प्राकृतिक उत्पाद इकाई स्थापित की हुई है। उन्होंने बताया कि सब्जी फसलों में तुरई, करेला, बैंगन, टमाटर, ऑर्गेनिक हल्दी के साथ-साथ दूसरी मौसमी सब्जी फसल शामिल है।
पशुपालन से भी बेहत्तर आय
उन्होंने बताया कि पशुधन के लिए भी जैविक चारा फसलों का उत्पादन लेता हॅू। पशुधन में मेरे पास 8 गाय, 4 भैँस और एक जोड़ी बैल है। प्रतिदिन 15-18 लीटर दुग्ध का उत्पादन होता है। इसमें से 15 लीटर दुग्ध का विपणन डेयरी को कर रहा हॅू। पशु अपशिष्ट से केचुआं खाद तैयार करता हॅू। उन्होंने बताया कि पशुपालन से मासिक 15 हजार रूपए की मासिक बचत मिल जाती है।
स्टोरी इनपुट: डॉ. बीएल रोत, केवीके, प्रतापगढ़