आठवीं पास किसान का कमाल, वर्मी कम्पोस्ट से खड़ी की लाखों की कमाई
(सभी तस्वीरें- हलधर)
हलधर टाइम्स/ पारलिया, चित्तौडग़ढ़। आठवीं पास व्यक्ति की क्षमताओं को भी कम नहीं आका जा सकता। क्योंकि, सफलता का कोई छोर नहीं है। यहां हम बात कर रहे है किसान शंकरलाल सुथार की। जो अब अपने साथ-साथ चार कृषि मजदूरों का 12 महीने रोजगार उपलब्ध करवा रहे है। साथ ही, गोबर से 4 लाख रूपए सालाना की शुद्ध बचत प्राप्त कर रहे है। जबकि, सकल आय का आंकड़ा 5 लाख रूपए के करीब है। किसान शंकरलाल ने हलधर टाइम्स को बताया कि मेरे पास साढे तीन बीघा जमीन है। उन्होंने बताया कि 8वीं के बाद स्कूल जाना छोड़ दिया। जब रोजी-रोटी का संघर्ष शुरू हुआ तो फर्नीचर का काम शुरू कर दिया। पहले यहां-वहां जाकर फर्नीचर का काम करता था। बाद में दुकान खोल ली। करीब 25 साल यह काम करने के बाद अब जैविक खाद उत्पादन और विपणन से जुड़ चुका हॅू। उन्होंने बताया कि मध्यप्रदेश के जावद में जैविक खेती के लाभ जानने समझने को मिले। इसके बाद प्लास्टिक बैग के सहारे वर्मी कम्पोस्ट बनाना शुरू किया। लेकिन, ज्यादा लाभ नहीं मिला। इसके बाद पक्की बेड़ तैयार करवाई। परिणाम रहा कि ना केवल खाद का उत्पादन बढ़ाने में मदद मिली। बल्कि, आमदनी का आंकड़ा और खाद की गुणवत्ता बढ़ाने मेें भी लाभ मिला। उन्होने बताया कि 8 साल के भीतर ही बचते का रेश्यो फर्नीचर के समान पहुंंच चुका है। उन्होंने बताया कि सिंचाई के लिए मेरे पास ट्यूबवैल है और परम्परागत फसलों में गेहूं, मक्का, उड़द का उत्पादन लेता हॅू। इन फसलों से सालाना 40-50 हजार रूपए की आमदनी मिल जाती है।
छोड़ दिया फर्नीचर काम
उन्होंने बताया कि फर्नीचर का काम छोडक़र गोबर का उद्यम शुरू किया। 8 साल पहले 3 प्लास्टिक बैग के साथ वर्मीकम्पोस्ट खाद बनाना शुरू किया। शुरूआती उत्पादन से मुनाफा अच्छा मिला तो यह व्यवसाय रास आ गया। उन्होंने बताया कि वर्मी कम्पोस्ट यूनिट स्थापना से मेरे साथ-साथ 4 कृषि मजदूरों को रोजगार मिला हुआ है। वहीं, 4 लाख रूपए की बचत इस व्यवसाय से मिल रही है। उन्होने बताया कि सालाना 1000-1200 बैग (एक बैग 40 किलो का) तैयार हो रहे है।
पशुपालन से लाभ
उन्होंने बताया कि वर्मी कम्पोस्ट उत्पादन के लिए पशुधन की संख्या में भी बढ़ाई। पहले 10 गाय मेरे पास थी। लेकिन, पिछले दिनों पश्ुाओ की संख्या को कम कर दिया है। वर्तमान में मेरे पास 2 गाय है। इससे रोजाना 5-6 लीटर दुग्ध का उत्पादन मिल रहाहै। दुग्ध घर में काम आ जाता है। वहीं, पशु अपशिष्ट खाद बनाने में। उन्होंने बताया कि पशुपालन को फिर से बढ़ाने की तैयारी है। लेकिन, उन्नत नस्ल के पशुओं के साथ।