एमएनसी की नौकरी छोड़ खेती शुरू की, अब गेंदा फूल दे रहा शानदार कमाई

नई दिल्ली 15-Sep-2026 12:22 PM

एमएनसी की नौकरी छोड़ खेती शुरू की, अब गेंदा फूल दे रहा शानदार कमाई

(सभी तस्वीरें- हलधर)

सेवाली, राजसमंद। दिखते नहीं जुगनू आसानी से...। लेकिन, आते है जब नजर अंधेरे दूर हो जाते है। जी हां, ऐसे ही किरदार है एमबीएस पास हर्षवर्धन सिंह। जो पहले पुणे में एक एमएनसी कंपनी में काम करते थे। लेकिन, अब खेतों में मेरीगोल्ड उगा रहे है। साथ ही, परम्परागत खेती करने वाले किसानों को भी आय बढौत्तरी का रास्ता दिखा रहे है। किसान हर्षवर्धन का कहना है कि अभी शुरूआत भर है, खेती के साथ बाजार की परेशानियों को शार्टआउट कर रहा हॅू। इसके बाद खेती को विस्तार दूंगा। ताकि, बंपर फसल उत्पादन की स्थिति में नुकसान नहीं उठाना पड़े। बता दें कि मेरी गोल्ड की फसल से किसान हर्षवर्धन को रोजाना 1500 रूपए की बचत मिल रही  है। किसान हर्षवर्धन ने हलधर टाइम्स को बताया कि खेती के बारे में कभी सोचा ही नहीं। पढ़ाई पूरी करने के बाद पुणे में जॉब करने लगा। पैकेज भी अच्छा था। लेकिन, दो साल पहले खेती का जुनून मुझे गांव खीच लाया। कुछ नया करने के  लिए प्रोजेक्ट तैयार किया। इरादों को जमीन देने के लिए जमीन को फसल उत्पादन के लिए तैयार किया। उन्होंने बताया कि परिवार के पास 18 बीघा जमीन है। लेकिन, खेती योग्य भूमि का रकबा 13 बीघा के करीब है। उन्होने बताया कि सिंचाई के लिए ट्यूबवैल है। परम्परागत फ सलों में गेहूं और मक्का उत्पादन ले रहा हॅू। इससे सालाना लाख रूपए की आमदनी मिल जाती है।

5 बीघा जमीन फूलों के नाम

उन्होंने बताया कि त्योहार और शादियों में फूलों की मांग को देखते हुए गेंदा फूल की खेती करना शुरू किया। शुरूआत डेढ़ बीघा क्षेत्र से हुई। लेकिन, अब पांच बीघा क्षेत्र में उत्पादन ले रहा हॅू। इससे रोजाना 1500 रूपए की आमदनी हो रही है। उन्होंने बताया कि सर्दी के मौसम में डहलिया की भी अच्छी मांग बाजार में देखने को मिली है। इसके उत्पादन की तैयारी भी मैने शुरू कर दी है। 

पपीता का बगीचा

उन्होने बताया कि कृषि विज्ञान केन्द्र की सलाह पर डेढ़ बीघा क्षेत्र में पपीते का बगीचा स्थापित किया है। पपीता की दो किस्मों के करीब साढे पंाच सौ पौधें लगे हुए है। इन दिनों पौधें पर फल बन रहे है। उत्पादन कितना मिलता है और आमदनी कितनी होगी, यह कहना अभी मुश्किल है। 

किचन गार्डन

उन्होंने बताया कि सब्जी फ सलों पर भी परीक्षण शुरू कर चुका है। चालू बरसात के सीजन में ऑर्गेनिक तरीके से भिंड़ी, टमाटर, मिर्च, लौकी की फसल लगाई है। उहोने बताया कि जैव आदान के लिए दो गाय रखी हुई है। इससे परिवार के लिए दुग्ध मिल जाता है और खेतो के लिए खाद उपलब्ध हो जाता है। 

स्टोरी इनपुट: डॉ. पीसी रैगर, केवीके, राजसंमद


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