सब्जी की खेती से साढ़े 3 लाख कमाई, किसान हरिशंकर की सफलता कहानी
(सभी तस्वीरें- हलधर)
जयनगर, भीलवाड़ा। जागरूकता और कृषि तकनीकी समझ। दोनों ही बातें किसान के लिए महत्वपूर्ण हैं। बिना, इनके किसान अपनी समृद्धि नहीं बढ़ा सकता है। इस बात को साबित कर दिखाया है किसान हरिशंकर शर्मा ने। इस किसान ने टिकाऊ आय के लिए अमरूद का बगीचा लगाया हुआ है। साथ ही, सब्जी फसलों का उत्पादन कर रहे हैं। कृषि से सालाना साढ़े तीन लाख की आय हरिशंकर को हो रही है। किसान हरिशंकर ने हलधर टाइम्स को बताया कि 12वीं पास करने के साथ ही खेती से जुड़ गया। मेरे पास साड़े सात बीघा कृषि भूमि है। पहले परम्परागत कृषि करता था। लेकिन, जैसे-जैसे परिवार का खर्च बढ़ता गया, ज्यादा आय लेने के लिए खेती के तौर-तरीकों में बदलाव लाता गया। परिणाम यह रहा कि खेती से आय भी बढ़ गई और तीन लड़के नौकरी भी लग गए। उन्होंने बताया कि बड़ा लड़का रेलवे में लोको पायलट है। मंझला कम्पाउंडर और छोटा लड़का इंजीनियर है। पढ़ाई का सारा खर्च खेती से ही निकाला है।
उन्होंने बताया कि खेती लाभ का सौदा नहीं रहा है। किसान साथियों की यह धारणा गलत है। उन्नत कृषि तकनीक और वैज्ञानिक सलाह से खेती और पशुपालन का कार्य किया जाए तो खेती से लाभ सुनिश्चित है। उन्होंने बताया कि पहले सिंचाई के लिए कुआं था। लेकिन, भू-जल स्तर नीचे गिर जाने के बाद ट्यूबवैल खुदवाया। इससे समय के साथ परम्परागत फसलों का उत्पादन बढ़ता गया। दो साल पहले बागवानी फसलों के उत्पादन से जुड़ा हूं। आपको बता दें कि किसान हरिशंकर कपास, मक्का, गेहूं, मूंग की फसल का उत्पादन लेता है। इन फसलों से 1 लाख रुपए की आय मिल जाती है।
गोभी से ढाई लाख
उन्होंने बताया कि 3 बीघा क्षेत्र में गोभी की बुवाई करता हूं। भाव अच्छे मिलने पर दो से ढाई लाख रुपए की आय इस फसल से मिल जाती है। सब्जी फसलों में गोभी के अलावा मिर्च का भी उत्पादन लेता हूं। आय बढ़ाने के लिए 2 वर्ष पूर्व 3 बीघा क्षेत्र में अमरूद का बगीचा स्थापित किया है। आगामी वर्ष में बगीचे से भी आय मिलना शुरू हो जायेगी।
फसलों में देसी खाद
उन्होंने बताया कि पशुधन में मेरे पास 4 भैंस है। प्रतिदिन 15 लीटर दुग्ध का उत्पादन मिल रहा है। दुग्ध का विपणन 45 रुपए प्रति लीटर की दर से डेयरी को कर रहा हूं। दुग्ध से मिलने वाली आमदनी से परिवार का दैनिक खर्च निकल जाता है। वहीं, सब्जी और परम्परागत फसलों की आमदनी मेरे लिए शुद्ध बचत के जैसी है।