खीरे और आलू ने किसान को बनाया लाखों का मालिक

नई दिल्ली 11-Jul-2026 12:18 PM

खीरे और आलू ने किसान को बनाया लाखों का मालिक

(सभी तस्वीरें- हलधर)

रोझा, बीकानेर। बड़ी जोत और सालों की मेहनत के बाद भी परम्परागत खेती में दोगुना आय करना सपने जैसा होता है। क्योंकि, कई जोखिम खेती की इस विधा से जुडे है। लेकिन, हाइटेक खेती निरतंर तरक्की की सीढ़ी चढ़ सकता है। इस बात को साबित कर दिखाया है किसान सुभाष रोझ ने। जिन्होंने वर्ष 2020 में हाईटेक खेती का रूख किया और अब 10-12 हजार वर्ग मीटर में संरक्षित खेती कर रहे है। चौकाने वाली बात यह है कि इस साल किसान सुभाष ने पॉली हाउस में आलू फसल का उत्पादन लिया है। उनका कहना है कि खेती से सालाना 40-45 लाख रूपए की आमदनी मिल जाती है। किसान सुभाष ने हलधर टाइम्स को बताया कि हम भाईयों के मध्य करीब पौने दो सौ बीघा जमीन है। सबकी अपनी जिम्मेदारी है। उन्होंने बताया कि संयुक्त परिवार के चलते ही खेती में यह तरक्की हुई है। उन्होंने बताया कि स्नातकोत्तर करने के बाद वर्ष 2008 में बीएड़ की। लेकिन, कभी नौकरी की दौड़ में शामिल नहीं हुआ। पढाई पूरी करके खेती से जुड़ा और वर्ष 2020 में 4 हजार वर्ग मीटर पॉली हाउस के साथ हाईटेक खेती का रूख किया। उन्होंने बताया कि कम पानी और कम समय में खीरे की फसल से अच्छा मुनाफा मिला तो संरक्षित खेती को विस्तार देना शुरू कर दिया। उन्होंने बताया कि वर्तमान में मेरे पास 4-4 हजार वर्ग मीटर के दो पॉली हाउस, दो-दो हजार वर्ग मीटर का शैडनेट और एक पॉलीहाउस है। उन्होने बताया कि सिंचाई के लिए नहरी पानी उपलब्ध है। इसके अलावा खेत पर डिग्गी बनाई हुई है। साथ ही, विद्युत बचत के लिए सोलर उर्जा संयंत्र लगाया हुआ है। उन्होंने बताया कि परम्परागत फसलों में मूंगफली, मूंग, ग्वार, मोठ, चना, सरसों, गेहंू और जौ का उत्पादन लेता हॅू। इन फसलों से सालाना 30 लाख रूपए की आमदनी मिल जाती है। गौरतलब है कि सुभाष आत्मा किसान पुरस्कार से सम्मानित हो चुके है।

खीरे के साथ आलू फसल

उन्होंने बताया कि पॉली हाउस में साल भर में खीरे की दो फसल का उत्पादन लेता हॅू। इस साल नवाचार करते हुए आलू की फसल लेकर देखी है। जिससे भी परिणाम अच्छे मिले है। उन्होंने बताया कि पॉलीहाऊस पश्चिमी राजस्थान के लिए बहुउपयोगी है। क्योंकि इस क्षेत्र मे सर्दी,गर्मी भी बहुतायत तेज पडती है। शीतलहर,गर्म हवाओं से फसल का वांछित लाभ लेना मुश्किल होता है। उन्होंने बताया कि संरक्षित फसल से सालाना 15 लाख रूपए का शुद्ध लाभ मिल जाता है।

उन्नत पशुपालन

उन्होंने बताया कि पशुधन में मेरे पास दर्जन भर गाय है। लेकिन, उत्पादित दुग्ध की बिक्री नहीं करता हॅॅू। दुग्ध परिवार की आवश्यकता पूर्ति में काम आ जाता है। वहीं, शेष रहने वाले दुग्ध से घी तैयार कर लेता हॅू। जबकि, पशु अपशिष्ट खाद के रूप में खेतों में काम आ जाता है।

स्टोरी इनपुट : डॉ. आके शिवरान, केवीके, लूणकरनसर, बीकानेर


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