4 गायों से शुरू किया डेयरी कारोबार, आज लाखों की कमाई कर रहीं जया
(सभी तस्वीरें- हलधर)
हलधर टाइम्स टाटीचा, डूंगरपुर। आंधियों से कोई कह दो औकात में रहें, एक तिनके ने सर उठाने की हिम्मत की है। डेयरी से आर्थिक आजादी पाने वाली यह महिला पशुपालक है जया पाटीदार। जिन्होंने परिवार के आर्थिक हालात के साथ-साथ करीब 20 महिलाओं की जिंदगी बदलने का काम किया है। किसान जया का कहना है कि जमीन के भरोसे रहते तो न तो परिवार के हालात बदलते और ना ही लाखों की आय होती। बता दें कि जया ने 4 पशुओं के सहारे डेयरी फार्मिंग का काम शुरू किया। बाद में केवीके का साथ मिला और पशुपालन के साथ-साथ खेती वैज्ञानिक सांचे में ढलती गई और आमदनी का आंकड़ा बढ़ता गया। किसान जया ने हलधर टाइम्स को बताया कि परिवार के पास 8 बीघा कृषि भूमि है। पहले परंपरागत फसलों का उत्पादन लेते थे। लेकिन, इससे मिलने वाली आय से परिवार का खर्च चलाना भी मुश्किल था। इस स्थिति को देखते हुए घरेलू पशुधन के बलबूते डेयरी की ओर कदम बढ़ाएं। वर्ष 2016 से दुग्ध की बिक्री करना शुरू किया। इसी दौरान मेरा संपर्क कृषि विज्ञान केन्द्र के वैज्ञानिकों से हुआ। उन्होंने मुझे उन्नत नस्ल के पशुओं की खरीद को प्रोत्साहित किया। इसके बाद गुजरात से 10 गिर गाय खरीदीं। इससे दुग्ध उत्पादन में बढ़ोतरी देखने को मिली। साथ ही, आय का आंकड़ा भी बढ़ने लगा। उन्होंने बताया कि मुझे डेयरी से सफल होते देख गांव की 20 महिलाओं ने भी पशुपालन पर ध्यान देना शुरू किया। अब मेरे साथ-साथ वह भी अच्छी आय प्राप्त कर रही हैं। उन्होंने बताया कि वर्तमान में मेरे पास 15 गाय और 7 भैंस हैं। प्रतिदिन डेढ़ क्विंटल के करीब दुग्ध का उत्पादन मिल रहा है। दुग्ध की बिक्री डेयरी को कर रही हूं। बता दें कि किसान जया डेयरी फार्मिंग के साथ-साथ सौर ऊर्जा भी चला रही हैं। उन्होंने बताया कि पशुओं के लिए 70 गुना 40 फीट आकार का पक्का पशु शेड बनाया हुआ है।
वर्मी खाद का उत्पादन
उन्होंने बताया कि गोपालन से जुड़ने के बाद मैंने वर्मी कम्पोस्ट उत्पादन की तकनीक का प्रशिक्षण लिया। इसके बाद केवीके की मदद से दो बेड वर्मी कम्पोस्ट की लगाई। लेकिन, वर्तमान में 6-7 ट्रॉली मासिक गोबर का उत्पादन हो रहा है। इस स्थिति को देखते हुए अब जैविक खाद उत्पादन पर भी फोकस कर रही हूं।
खेती से लाख
उन्होंने बताया कि जमीन में चारा बाजरा, नेपियर घास लगाई हुई है। वहीं, सोयाबीन, तिल, गेहूं और चना फसल का उत्पादन लेती हैं। इन फसलों से सालाना लाख रुपए की आमदनी मिल जाती है। पहले सब्जी उत्पादन को भी व्यवसाय का रूप दिया था। लेकिन, अब घरेलू आवश्यकता पूर्ति तक सीमित कर दिया है। सिंचाई के लिए कुआं और ट्यूबवेल है। विद्युत बचत के लिए सौर ऊर्जा पंप लगाया हुआ है।
स्टोरी इनपुट: डॉ. सीएम बलाई, केवीके, डूंगरपुर