12 बीघा खेती से किसान ने खड़ी की 14 लाख की कमाई
(सभी तस्वीरें- हलधर)
डाबड़ी, जोधपुर। सीमित सिंचाई और पारंपरिक खेती से होने वाली कम आमदनी के कारण परिवार का खर्च चलाने के लिए अतिरिक्त रोजगार करने वाले किसान ईश्वर मेघवाल ने आधुनिक कृषि तकनीक अपनाकर अपनी आर्थिक स्थिति में बड़ा बदलाव किया है। कृषि विशेषज्ञों के मार्गदर्शन में पॉली हाउस में खीरे का उत्पादन, खुले खेत में सब्जी खेती और पशुपालन को अपनाकर उनकी कृषि से सकल सालाना आय अब करीब 13 से 14 लाख रुपये तक पहुंच गई है। किसान ईश्वर मेघवाल ने हलधर टाइम्स को बताया कि उनके परिवार के पास 12 बीघा कृषि भूमि है। पहले सिंचाई की कमी के चलते मुख्य रूप से वर्षाकालीन और पारंपरिक फसलों पर निर्भरता थी। कपास, मूंगफली, बाजरा, मूंग और मोठ जैसी फसलों से सालाना महज 50 से 60 हजार रुपये की आय होती थी। ऐसे में परिवार का खर्च चलाने के लिए खेती के साथ दूसरा रोजगार करना पड़ता था। उन्होंने बताया कि करीब डेढ़ वर्ष पहले तक आमदनी सीमित थी। लेकिन, हाईटेक खेती अपनाने के बाद स्थिति बदल गई। कृषि वैज्ञानिकों की सलाह पर पॉली हाउस में खीरे का उत्पादन शुरू किया। 4 हजार वर्ग मीटर क्षेत्र में स्थापित पॉली हाउस से सालाना 10 लाख रुपये की बचत मिल जाती है।
अब 5-6 बीघा में सब्जी उत्पादन
ईश्वर मेघवाल ने बताया कि खेती से आय बढ़ाने की शुरुआत उन्होंने एक बीघा क्षेत्र में पत्तागोभी, लौकी और मिर्च जैसी सब्जियों की खेती से की। सब्जी उत्पादन से प्राप्त बेहतर आमदनी को देखते हुए धीरे.धीरे इसका क्षेत्रफल बढ़ाते गए। वर्तमान में वे 5 से 6 बीघा भूमि पर विभिन्न सब्जी फसलों का उत्पादन ले रहे हैं। इन फसलों से लागत निकालने के बाद करीब 3 से 4 लाख रुपये की आय प्राप्त हो रही है। किसान का कहना है कि यदि सब्जी उत्पादन का कार्य कृषि विशेषज्ञों की देखरेख और वैज्ञानिक सलाह के अनुसार किया जाएए तो यह किसानों की आर्थिक स्थिति बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
पशुपालन और कंपोस्ट खाद से अतिरिक्त लाभ
कृषि के साथ ईश्वर मेघवाल पशुपालन भी कर रहे हैं। उनके पास चार गाय और एक भैंस है। जिनसे प्रतिदिन करीब 10 से 15 लीटर दूध का उत्पादन होता है। पशुपालन से उन्हें प्रतिमाह लगभग 10 से 12 हजार रुपये की आय प्राप्त हो रही है। वे पशु अपशिष्ट से कंपोस्ट खाद तैयार कर उसे खेती में उपयोग करते हैंए जिससे जैविक पोषण के साथ खेती की लागत को नियंत्रित करने में भी मदद मिल रही है।