खजूर की खेती से प्रति बीघा 2 लाख कमाई, किसान बना मिसाल
(सभी तस्वीरें- हलधर)
देईदासपुरा, श्रीगंगानगर। रेतीले धोरे में खजूर की खेती किसानों के लिए मुनाफे का सौदा बनने लगी है। जिन किसानों ने वर्ष 2009 में खजूर के बगीचे लगाये थे, उनसे भरपूर उत्पादन मिलने लगा है। खजूर की खेती में सुनहरा अध्याय लिखने वाले ऐसे ही एक किसान हैं बद्रीनारायण शर्मा। बद्रीनारायण क्षेत्र में खजूर प्रशिक्षक के रूप में भी पहचाने जाने लगे हैं। आपको बता दें कि किसान बद्रीनारायण खजूर की खेती करके प्रति बीघा 2 लाख रुपए की आय ले रहा है। 28 बीघा क्षेत्र में यह किसान खजूर की खेती कर रहा है। किसान बद्रीनारायण ने हलधर टाइम्स को बताया कि मेरे पास 62 बीघा कृषि भूमि है। बचपन में गरीबी से संघर्ष करना पड़ा। इसके चलते सातवीं पास करने के साथ ही स्कूल से नाता टूट गया। पढ़ाई के शौक के चलते जैसे समय मिलता घर पर ही स्कूली किताबें पढ़ता रहता। यही कारण रहा कि परंपरागत और तकनीक आधारित खेती की पूरी समझ रखता हूं। उन्होंने बताया कि पहले जमीन बारानी थी। इसके चलते फसल उत्पादन रामभरोसे था। बरसात होने से ही खेतों से आय मिल पाती थी। लेकिन, आज खेतों की तस्वीर बदल चुकी है। पंजाब-हरियाणा के किसान खजूर की खेती को देखने समझने के लिए मेरे गांव पहुंचने लगे हैं। किसानों को खजूर की खेती से जुड़ी जानकारी देने के लिए मैं एक किताब लिख चुका हूं। साथ ही, गांव में ही किसानों के लिए प्रशिक्षण केन्द्र खोला हुआ है। यहां मैं किसानों को निःशुल्क खजूर खेती की जानकारी दे रहा हूं।
आपको बता दें कि किसान बद्रीनारायण ने 4 बीघा क्षेत्र से खजूर खेती शुरू की थी। वर्तमान में 28 बीघा क्षेत्र में खजूर का उत्पादन ले रहे हैं। उन्होंने बताया कि खजूर सहित दूसरी सभी फसलों का उत्पादन जैविक तरीके से कर रहा हूं। परंपरागत फसलों में बाजरा, ग्वार, मोठ, गेहूं और सरसों की फसल का उत्पादन लेता हूं।
ऐसे बढ़ाया दायरा
उन्होंने बताया कि वर्ष 2009 में 4 बीघा क्षेत्र में खजूर का बगीचा स्थापित किया। उत्पादन मिलने लगा तो 15-20 हजार रुपए प्रति बीघा की आय मिलने लगी। खजूर खेती की शुरुआत बीजू पौधों से की थी। वर्ष 2012 में टिशू कल्चर आधारित खजूर के पौधे लाए। इसके बाद वर्ष 2013 में 13 बीघा और वर्ष 2014 में 8 बीघा क्षेत्र में खजूर का नया बगीचा स्थापित किया। वर्तमान में 800 पौधों से उत्पादन मिल रहा है। शेष पौधों में आगामी वर्ष से उत्पादन मिलना शुरू हो जायेगा। उन्होंने बताया कि जो पौधे सात साल के हो चुके हैं, उनसे प्रति बीघा 2 लाख तक आय मिल रही है। खजूर का विपणन फतेहपुर, सरदारशहर, रतनगढ़, सीकर मंडी में कर रहा हूं।
मिनी डेयरी भी
पशुधन में मेरे पास 15 गाय और 3 बैल हैं। इनसे प्रतिदिन 10-15 लीटर दूध का उत्पादन मिलता है। दुग्ध का विपणन डेयरी को 25-30 रुपए प्रति लीटर की दर से कर रहा हूं। गो-मूत्र और देसी खाद प्राप्ति के लिए गायों का पालन किया हुआ है। पशु अपशिष्ट से वर्मी कम्पोस्ट तैयार करके उपयोग में ले रहा हूं