किसान ने बदली खेती की तस्वीर, 4 लाख से 32 लाख पहुंची कमाई 

नई दिल्ली 26-Oct-2026 03:17 PM

किसान ने बदली खेती की तस्वीर, 4 लाख से 32 लाख पहुंची कमाई 

(सभी तस्वीरें- हलधर)

चिरावण्ड़ा, करौली। पानी की कमी और खेती की कठिन परिस्थितियों के लिए पहचाने जाने वाले करौली जिले के डांग क्षेत्र में किसान धर्म सिंह गुर्जर ने संरक्षित खेती के दम पर सफलता की नई इबारत लिखी है। महज साक्षर धर्म सिंह ने नई तकनीक को अपनाकर अपनी खेती की सालाना कमाई को कई गुना बढ़ा दिया। जिस खेती से पहले उन्हें करीब 4 लाख रुपए सालाना मिलते थे, उसी खेती से अब करीब 32 लाख रुपए की सकल आय और सरंक्षित खेती से 24 लाख रुपए तक शुद्ध मुनाफा हो रहा है। किसान धर्म सिंह ने हलधर टाइम्स को बताया कि अब खेती में काफी उतार-चढ़ाव देखे है। लेकिन, संरक्षित खेती से जुडऩे के बाद लगा कि खेती किसान के लिए वाकई लाभकारी है। यदि, इसमें वैज्ञानिक तौर-तरीको का उपयोग किया जाएं। उन्होंने बताया कि मेरे पास 14 बीघा जमीन है। होश संभालने के बाद से खेती कर रहा हॅू। इसे से हुई कमाई से बेटे को कृषि अधिकारी बनाया है। बता दें कि धर्म सिंह के लिए खेती में बदलाव की शुरुआत घर से ही हुई। उन्होने बताया कि मुझे आधुनिक खेती से जोडऩे का पूरा श्रेय बेटे को है। उसकी इच्छा पर ही संरक्षित खेती को अपनाया और अब परिणाम सबके सामने है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2023 में पहला पॉली हाउस स्थापित किया और उसमें खीरे का उत्पादन शुरू किया। बेहतर उत्पादन और बढ़ी आमदनी ने उनका हौसला बढ़ाया तो वर्ष 2024 में एक और पॉली हाउस के साथ एक शेडनेट हाउस भी स्थापित कर दिया। आज वे करीब 12 हजार वर्गमीटर क्षेत्र में संरक्षित खेती कर रहा हॅू। उन्होंने बताया कि सिंचाई के लिए मेरे पास एक कुआं और एक बोरवैल है। परम्परागत फसलो में गेहूं, चना, सरसों और बाजरे का उत्पादन लेता हॅू। इन फसलों से सालाना दो लाख रूपए की आमदनी मिल जाती है। 

पानी की कमी को तकनीक से दी मात

डांग क्षेत्र की चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के बीच धर्म सिंह ने उपलब्ध पानी का बेहतर इस्तेमाल कर खेती को लाभकारी बनाया है। उन्होंने बताया कि पॉली हाउस लगाने के बाद पानी की बचत भी देखने को मिली है। बूंद-बूंद सिंचाई से फसल उत्पादन में पानी कम लग रहा है। गौरतलब है कि दो पॉली हाउस और एक शैडनेट हाउस में किसान धर्म सिंह खीरा फसल का उत्पादन ले रहे है। इससे सालाना 24 लाख रूपए का शुद्ध मुनाफा मिल रहा है। 

पपीता का बगीचा

संरक्षित खेती में सफलता मिलने के बाद उन्होंने अब आय का एक और जरिया तैयार किया है। खेत में 580 पपीते के पौधों का बगीचा लगाया गया है। फिलहाल इससे व्यावसायिक उत्पादन मिलना बाकी है। पपीते का उत्पादन शुरू होने के बाद खेती से होने वाली कुल आमदनी में और इजाफा होने की उम्मीद है।

पशुपालन भी मजबूत सहारा

उन्होंने बताया कि भैंस पालन से परिवार का जुड़ाव शुरू से ही रहा। पिछले साल से गौपालन भी शुरूय कर दिया है। वर्तमान में मेरे पास  पास 8 साहीवाल नस्ल की गाय और 13 भैंसें हैं। इनसे प्रतिदिन करीब 80 लीटर दूध का उत्पादन होता है, जिसे लगभग 60 रुपए प्रति लीटर की दर से डेयरी को बेच रहा हॅू।  पशुओं के बेहतर प्रबंधन के लिए पक्का शेड भी बनाया गया है। पशुपालन से खर्च निकालने के बाद सालाना 8 लाख रूपए से अधिक की आमदनी मिल जाती है। वहीं, पशु अपशिष्ट से वर्मी कम्पोस्ट खाद तैयार कर रहा हॅू। 

स्टोरी इनपुट: सुरेन्द्र हरितवाल, कृषि विभाग, जयपुर


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