नौकरी छोड़ी, खेती अपनाई; अब 8 बीघा से लाखों की आय

नई दिल्ली 17-Jun-2026 12:08 PM

नौकरी छोड़ी, खेती अपनाई; अब 8 बीघा से लाखों की आय

(सभी तस्वीरें- हलधर)

गोपालपुरा, कोटा। उन्नत तरीके से खेती की जाए तो छोटी जमीन के जरिए समृद्ध बना जा सकता है। प्रदेश के कई किसानों ने इस बात को साबित भी किया है। इन्हीं किसानों में से एक हैं किसान मनीष चौधरी। जो आठ बीघा जमीन में सब्जी फसलोंं का उत्पादन लेकर सालाना साढ़े-तीन से चार लाख रू पए का शुद्ध मुनाफा ले रहे है। जबकि, सकल आय का आंकड़ा 7-8 लाख रूपए के करीब है। किसान मीनष ने हलधर टाइम्स को बताया कि वर्ष वर्ष 2024 में कृषि से स्नातक करने के बाद दो साल कृषि आदान कम्पनियों में काम किया। लेकिन, भाग-दौड़ वाली नौकरी मुझे ज्यादा पंसद नहीं आई। इस कारण नौकरी छोडक़र खेती को नई दिशा देना शुरू किया। उन्होने बताया कि सब्जी फसलो का पहले परम्परागत तौर-तरीके से उत्पादन लेते थे। लेकिन, आमदनी कम मिलती थी। वहीं, कृषि आदान की भी ज्यादा जरूरत पड़ती थी। इस स्थिति को देखते हुए मैने जल बचत के लिए बूंद-बूंद सिंचाई को अपनाया और प्लास्टिक मल्च का उपयोग करने लगा। इससे ना केवल सब्जी फसलो की गुणवत्ता में सुधार हुआ। साथ ही, उत्पादन में भी बढौत्तरी देखने को मिली। उन्होंने बताया कि परिवार के पास 60 बीघा जमीन है। सिंचाई के लिए ट्यूबवैल है। उन्होंने बताया कि परम्परागत फसलों में गेहूं, सोयाबीन और धान का उत्पादन लेते है। इन फसलों से सालाना 3-4 लाख रूपए की बचत मिल जाती है। 

इन फसलों का उत्पादन
उन्होंने बताया कि सब्जी फसलों की खेती पहले तीन बीघा क्षेत्र में करते थे। लेकिन, अब दायरा बढ़ चुका है। वर्तमान में 8 बीघा क्षेत्र में सब्जी फसलो का उत्पादन ले रहा हॅू। सब्जी फसलों में करेला, बैंगन, टमाटर, लौकी, धनिया सहित अन्य फसलों का उत्पादन ले रहा हॅू। इन फसलों से सालाना साढे तीन से चार लाख रूपए की आमदनी हो जाती है। 

गौपालन भी लाभकारी
उन्होंने बताया कि मेरे पास पशुधन में तीन गाय है। प्रतिदिन 8-10 लीटर दुग्ध का उत्पादन मिल रहा है। लेकिन, मै दुग्ध की बिक्री नहीं करता हॅू। दुग्ध की खपत परिवार की आवश्यकता पूर्ति में हो जाती है। वहीं, गोबर खेतों में काम आ जाता है। 
स्टोरी इनपुट: एनबी मालव, उपनिदेशक, उद्यान, कोटा


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