कच्छ के किसान ने उगाया सोना, खजूर की नई किस्म से बढ़ेगी कमाई
(सभी तस्वीरें- हलधर)जयपुर। सोना अब किसानों को आर्थिक आजादी दिलाने महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। इससे किसान आय में नई चमक देखने को मिलेगी। वहीं, स्वाद भी अनूठा होगा। दरअसल, यहां हम बात कर रहे है खजूर किस्म सोना-100 की। जिसे कच्छ के किसान ने तैयार किया है। यह किस्म बरही जैसी दिखती जरूर है। लेकिन, इसका उत्पादन स्तर, फल का आकार और स्वाद अनूठा है। गौरतलब है कि 16 साल की मेहनत के बाद इस नई किस्म का विकास हुआ है। सरदार कृषिनगर दांतीवाड़ा कृषि विश्वविद्यालय के खजूर अनुसंधान केन्द्र के सुनील पुरोहित ने बताया कि इस किस्म का विकास जारपरा-मुंद्रा के किसान मेघराज नाथा ने किया है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2010 में बीज से प्राकृतिक रूप से उगे एक खजूर के पौधे में कुछ असाधारण गुण दिखाई दिए। इसका फल अपेक्षाकृत बड़ा, मीठा और आकर्षक रंग वाला था। जानकारी सामने आने पर हैदराबाद की एस एग्रो टेक्नोलॉजी के प्रतिनिधियों ने मातृ पौधे का निरीक्षण किया। साथ ही, पौधे की खरीद की। वैज्ञानिक मूल्यांकन के बाद वर्ष 2015 में 500 टिश्यू कल्चर पौधे तैयार किए गए और इन्हें खजूर अनुसंधान केंद्र और किसानों के खेतों में लगाया गया। वर्ष 2018 में इनमें फलन देखा गया और पौधों में मातृ पौधे जैसे गुण पाए गए।
सोना-100 की विशेषता
उन्होंने बताया कि कच्छ क्षेत्र में बरही किस्म किसानों की पसंद है। लेकिन, सोना-100 किस्म बरही से ज्यादा क्षमता रखती है। इसकी पत्तियां बरही से छोटी, प्ररोह अधिक, वर्षा सहनशीलता ज्यादा, फल का रंग लाल, फसल का औसत वजन 25-30 ग्राम, बेलनाकार और प्रति पौधा उपज 100-150 किलोग्राम है। इसके फल 15-30 जून के मध्य पककर तैयार हो जाते है।
किसान के नाम से पंजीयन
उन्होंने बताया कि पादप किस्म और कृषक अधिकार संरक्षण प्राधिकरण, नई दिल्ली में इस किस्म का पंजीयन किसान मेघराज के नाम से हुआ है।
क्या कहते है विशेषज्ञ
खजूर अनुसंधान केंद्र के देवसी भाई ने बताया कि कच्छ की धरती से निकला यह सोना आने वाले वर्षों में देश के शुष्क और अर्द्ध-शुष्क क्षेत्रों की कृषि कहानी में कितना बड़ा अध्याय लिखेगा। इसका लाभ गुजरात के साथ-साथ राजस्थान के किसानों को भी मिलेगा।