चोरों से परेशान किसान ने बदली फसल, अब कमाती हैं 11 लाख
(सभी तस्वीरें- हलधर)
देवलीकला, कोटा। फसल की 24 घंटे निगरानी तो संभव नहीं थी। चोरी से आर्थिक नुकसान तो जरूर हुआ। लेकिन, एक ऐसा सबक भी मिला, जिसका अब चोरों के पास कोई तोड़ नहीं है। जी हां, कुछ ऐसी की कहानी है महिला कृषक मनोहर देवी की। जिन्होंने बगीचे से अमरूद चोरी की समस्या से तंग आकर, ऐसी औषधीय फसलों को उपजाना शुरू किया। जिसकी प्रदेश में बिक्री नहीं हो। बता दें कि मनोहर देवी यादव संतरा की बागवानी के साथ-साथ औषधी निर्माण में उपयोग आने वाली फसल रोजेल, कस्तूरी भिंड़ी और चिरायता की खेती कर रही है। वहीं, परम्परागत फ सलों से भी अच्छा लाभ कमा रही है। इससे सालाना 10-11 लाख रूपए तक की आय मिल रही है। किसान मनोहर देवी ने हलधर टाइम्स को बताया कि परिवार के पास 25 बीघा कृषि भूमि है। शादी के बाद से ही घर की जिम्मेदारी के साथ-साथ खेती का प्रबंधन भी देख रही हॅू। उन्होंने बताया कि पहले परम्परागत फसलों के उत्पादन तक सीमित रही। लेकिन, अब औषधीय फसलों के उत्पादन में भाग्य आजमा रही हॅू। बता दें कि किसान मनोहर देवी ने अमरूद का बगीचा नष्ट करके औषधीय फसलों की खेती शुरू की है। उन्होंने बताया कि आय बढौत्तरी के लिए 6 बीघा जमीन में अमरूद का बगीचा स्थापित किया था। जब बगीचे से उत्पादन मिलना शुरू हुआ तो अमरूद चोरी जाने लगे। इससे ज्यादा लाभ नहीं मिल पाया। इस स्थिति को देखते हुए औषधीय फसलों की ओर रूख किया है। क्योंकि, इन फसलों का राजस्थान में मार्केट नहीं है। यदि फसल चोरी भी हो जाएं तो उसकी बिक्री के लिए नीमच जाना पड़ेगा। यानी लाभ से ज्यादा खर्चा। बड़ी बात यह है कि इन फसलों को छुट्टा पशुओं से भी कोई नुकसान नहीं है और यह सभी फसल कम लागत में 5 महीने में तैयार होकर अच्छा उत्पादन देती है। उन्होंने बताया कि सिंचाई के लिए मेरे पास कुआं है। परम्परागत फसलों में सोयाबीन, मूंगफली, सरसों, गेहूं, चना, जौ और धनिया का उत्पादन लेती हॅू। इन फसलों से सालाना तीन से साढे तीन लाख रूपए की आमदनी हो जाती है।
बहु गुणकारी है यह फसल
बात करें औषधीय फसल रोजेल, कस्तूरी भिंड़ी और चिरायता की तो यह फसल बहुपयोगी होने के साथ-साथ बहुगुणकारी भी है। मौटे तौर पर यह सभी फसल पांच महीने में तैयार हो जाती है। खरीफ मौसम की इन फसलों से अच्छी आमदनी भी किसानों को मिलती है। जानकारी के मुताबिक औषधीय फसल रोजेल का उपयोग देसी-अंगे्रजी दवा निर्माण के साथ-साथ खाद्य और पेय पदार्थो में किया जाता है। वहीं, कस्तूरी भिंड़ी का उपयोग सौन्दर्य प्रसाधन उत्पादन बनाने में किया जाता है। जबकि, चिरायता का उपयोग आयुर्वेदिक दवा निर्माण में होता है।
संतरा बगीचे से 3 लाख
उन्होंने बताया कि टिकाऊ आय के लिए 8 बीघा जमीन में संतरे का बगीचा लगाया हुआ है। यह बगीचा 6 साल का हो चुका है। बगीचे से शुरूआत में 60 हजार रूपए की आमदनी हुई। लेकिन, अब आमदनी का आंकड़ा 3 लाख रूपए तक पहुंच चुका है।
पशुधन से आय
उन्होंने बताया कि पशुधन में मेरे पास आधा दर्जन भैंस और दो गाय है। प्रतिदिन 15-20 लीटर दुग्ध का उत्पादन मिलता है। इसमें से पशुधन का दैनिक खर्च निकालने के लिए थोड़ा दुग्ध डेयरी को बिक्री कर देती हूॅ। शेष का उपयोग घी बनाने और परिवार की आवश्यकता पूर्ति में हो जाता है। पशु अपशिष्ट से कम्पोस्ट खाद बना रही हॅू।
स्टोरी इनपुट:- एनबी मालव, उपनिदेशक उद्यान, कोटा