हाईटेक खेती से किसान की सालाना 32 लाख शुद्ध कमाई

नई दिल्ली 27-Jul-2026 12:47 PM

हाईटेक खेती से किसान की सालाना 32 लाख शुद्ध कमाई

(सभी तस्वीरें- हलधर)

इंदावड़,नागौर। रसातल समाते पानी से खेती में दिक्कत आने लगी थी। उत्पादन में गिरावट के साथ आय का आंकड़ा गिरने लगा। इस स्थिति को देखते हुए पहले बड़ा फार्मपौंड बनाया और हाईटेक खेती को अपनाया। परिणाम यह रहा है कि 8 हजार वर्ग मीटर क्षेत्र ने ही शुद्ध 16 लाख रूपए की आमदनी होने लगी है। जबकि, इतनी आमदनी पहले 50 बीघा जमीन से दोनों मौसम की फसलों को मिलाकर मिलती थी। किसान रामदेव डिडेल का कहना है कि पॉली हाउस लगाने के बाद आय का सालाना आंकड़ा 32 लाख रूपए तक पहुंच चुका है। किसान रामदेव ने हलधर टाइम्स को बताया कि परिवार के पास 50 बीघा जमीन है। स्नातक करने के बाद मैं भी खेती से जुड़ गया। उन्होंने बताया कि पानी की कमी के चलते फसल उत्पादन में दिक्कत आने लगी थी। इस स्थिति को देखते हुए पहले सामुदायिक फार्मपौंड खुदवाया। इसके बाद बिना कुछ सोचे हाईटेक खेती का रूख कर लिया। उन्होंने बताया कि पहला पॉली हाउस 2 साल पहले स्थापित किया था। जबकि, दूसरा 6 माह पहले। उन्होंने बताया कि पॉली हाउस में खीरा फसल का उत्पादन ले रहा हॅू। उन्होंने बताया कि सिंचाई के लिए फार्मपौंड पानी के साथ-साथ ट्यूबवैल भी है। इससे पूरी जमीन में सिंचाई की सुविधा उपलब्ध हो रही है। उन्होंने बताया कि परम्परागत फसलों में कपास, जीरा, गेहूं, सरसों सहित अन्य फसलों का उत्पादन लेता हॅू। इन फसलों से सालाना 12-13 लाख रूपए की आमदनी मिल रही है। 

खीरे से आय दोगुना

उन्होंने बताया कि पॉली हाउस में खीरे की फसल का उत्पादन लेता हॅू। सालभर में खीरे की दो फसल का उत्पादन लेता हॅू। इस फसल में खर्च निकालने के बाद 4 लाख रूपए की शुद्ध बचत हो रही है। इस तरह 16 लाख रूपए की आमदनी हो जाती है। साथ ही, पानी की बचत भी इस खेती में देखने को मिली है।

एक एकड़ में सब्जी उत्पादन

उन्होने बताया कि पॉली हाउस के अलावा ओपन फील्ड में एक एकड़ क्षेत्र में सब्जी फसलों का उत्पादन ले रहा हॅू। सब्जी फसलों में टिण्डा, टमाटर और मिर्च का उत्पादन लेता हॅू। इन फसलों से सालाना दो लाख रूपए की आमदनी मिल जाती है। 

उन्नत पशुपालन

उन्होंने बताया कि पशुपालन में 1 गाय और 2 भैंस मेरे पास है। प्रतिदिन 10-15 लीटर दुग्ध का उत्पादन मिल रहा है। लेकिन, दुग्ध की बिक्री नहीं करता हॅू। परिवार की आवश्यकता पूर्ति के बाद दुग्ध से घी तैयार कर रहा हॅू। वहीं, पशु अपशिष्ट से वर्मी कम्पोस्ट खाद तैयार करके उपयोग ले रहा हॅू। 4 वर्मी बेड़ मेरे पास है। 

स्टोरी इनपुट: रफीक अहमद कु रैशी, पूर्व सहायक कृषि अधिकारी उद्यान, पीपाड़सिटी-जोधपुर


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