रसायन मुक्त खेतों से बढ़ी आमदनी
(सभी तस्वीरें- हलधर)
उदलपुरा, भीलवाड़ा। दूर कहां है मंजिल, जब हौंसला अडिग हो। जैविक से जमीन को सरसब्ज करने वाला यह किसान है प्रह्लाद राय मेघवंशी। उनका कहना है कि पहले खेती में लाभ और हानि का अंतर करना ही मुश्किल था। लेकिन, रसायन मुक्त खेती अपनाने के बाद दो पैसे की बचत नजर आने लगी है। गौरतलब है कि किसान प्रह्लाद को खेती से सालाना तीन से साढ़े तीन लाख रूपए की आमदनी मिल रही है। किसान प्रह्लाद ने हलधर टाइम्स को बताया कि परिवार के पास 20 बीघा जमीन है। उन्होंने बताया कि स्नातक करने के साथ ही खेती से जुड़ गया। इसके बाद खेती से आय बढाने के लिए कुछ नया करना चाह रहा था। इसी बीच मेरा कृषि वैज्ञानिकों से सम्पर्क हुआ। उन्होंने बागवानी से जुडऩे की सलाह दी। लेकिन, मैने खेतों को जैविक बनाने की ठानी। साथ ही, आमजन को भी रसायन मुक्त अनाज के फायदें बताना शुरू किया। समय के साथ खेत जैविक हुए तो लेबर की समस्या से भी दो चार हुआ। लेकिन, हिम्मत नहीं हारी। उन्होंने बताया कि लगातार प्रयासों से अब जैविक फसल उत्पादन का स्तर पहले के जैसा हो चुका है। लागत काफी कम हो चुकी है। पहले मंहगी दवा बाजार से लाते थे। लेकिन, अब सारे जैव कीटनाशक खेत पर तैयार हो रहे है। उल्लेखनीय है कि किसान प्रह्लाद मक्का, गेहूं, सरसों, मूंगफली और उड़द का जैविक उत्पादन ले रहा है। उन्होंने बताया कि जैविक कृषि कार्यक्रमों में भाग लेने से जैविक उत्पादों का बाजार मिल चुका है। उन्होने बताया कि सिंचाई के लिए मेरे पास कुआं है। परम्परागत फसलो के उत्पादन से सालाना तीन से साढे लाख रूपए की आमदनी मिल जाती है।
नींबू की बागवानी
उन्होंने बताया कि खेतों को जैविक बनाने के बाद कृषि वैज्ञानिकों की सलाह पर अमल किया। 5 साल पहले खेत में नींबू का बगीचा स्थापित किया। इससे भी आय मिलने लगी है। उन्होंने बताया कि बगीचे में नींबू के 300 पौधें लगे हुए है। इससे भी सालाना 50-60 हजार रूपए की आमदनी मिल जाती है।
स्वयं तैयार करते है जैव कीटनाशी
उन्होंने बताया कि फसल की जरूरत के सभी आदान खेत में ही स्वयं तैयार कर रहा हॅू। इससे खेत के आस-पास उगने वाली वनस्पतियों का भी उपयोग हो रहा है। साथ ही, खरपतवार हटाने पर खर्च होने वाले पैसे की भी बचत हो रही है।