पॉली हाउस ने बदली किसान की किस्मत, आय पहुंची 8 लाख
(सभी तस्वीरें- हलधर)
भीमलत, भीलवाड़ा। सोचा ही नहीं था, कभी मुख्यमंत्री से संवाद करूंगा। लेकिन, संरक्षित खेती ने मुझे यह मुकाम दिया है। यह कहना है किसान हरफूल जाट का। जिन्होंने परम्परागत फसलों से हटकर कुछ करने की सोच के साथ पॉली हाउस लगाया। परिणाम रहा है कि पिछले दिनों भीलवाड़ा में आयोजित ग्राम चौपाल में मुख्यमंंत्री भजनलाल शर्मा से लाभार्थी किसान के रूप में संवाद करने का अवसर मिला। किसान हरफूल ने बताया कि पॉली हाउस से इस साल डेढ़ से पौने दो लाख रूपए की शुद्ध आय मिली है। इससे सकल आय का आंकड़ा बढक़र 8 लाख रूपए के करीब पहुंच चुका है। किसान हरफूल ने हलधर टाइम्स को बताया कि परिवार के पास 12 बीघा जमीन है। परिवार शुरू से ही परम्परागत फसलों की खेती करता आ रहा है। परिवार की आर्थिक स्थिति सामान्य होने के चलते रसायन से स्नातकोत्तर की उपाधि ली। साथ ही, प्राईवेट जॉब करने लगा। उन्होने बताया कि सुबह-शाम खेती के काम करने के दौरान विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर संरक्षित खेती के बारे मे जानने-समझने का मौका मिला। इसके बाद जयपुर के गुढ़ाकुमावतान गांव में पहुंचकर किसानों के खेतों पर लगे पॉली हाउस का अवलोकन किया। साथ ही, उनके अनुभव जाने। उन्होंने बताया कि संरक्षित खेती की तकनीकी जानकारी मेरे पास नहीं थी। लेकिन, खेती मेें कुछ नया करने का हौंसला अडिग था। इसी सोच के साथ उद्यान विभाग में पॉली हाउस स्थापना के लिए आवेदन कर दिया। पिछले साल ही दो हजार वर्ग मीटर क्षेत्र में पॉली हाउस बनकर तैयार हुआ है। उन्होंने बताया कि पॉली हाउस में खीरा और मिर्च की फसल ले रहा हॅू। खीरे की पहली फसल से डेढ़ लाख रूपए का शुद्ध मुनाफा मिला है।
परम्परात से अच्छी आय
उन्होने बताया कि परम्परागत फसलों में कपास, गेहूं, सरसों, ज्वार का उत्पादन लेता हॅू। इन फसलो से सालाना 5-7 लाख रूपए की आमदनी मिल जाती है। सिंचाई के लिए मेरे पास कुआं और ट्यूबवैल है। पॉली हाउस में ड्रिप लगाई हुई है। उन्होंने बताया कि पहली फसल उत्पादन के साथ प्रायोगिक अनुभव मुझे हुए है। इससे आगामी फसल से बेहत्तर आय मिलने की उम्मीद है।
उन्नत पशुपालन
उन्होंने बताया कि पशुधन में मेरे पास 2 र्भैस है। प्रतिदिन 15-16 लीटर दुग्ध का उत्पादन मिलता है। दुग्ध घर में काम आ जाता है। वहीं, पशु अपशिष्ट से वर्मी कम्पोस्ट खाद तैयार करके उपयोग में ले रहा हॅू।
स्टोरी इनपुट: उषा मीणा, प्रभुदयाल जाट, कृषि विभाग, गुलाबुपरा।