मसाला उद्योग से आत्मनिर्भर बने दिव्यांग
(सभी तस्वीरें- हलधर)
बस्सी, चित्तौडग़ढ़। हौंसले से हालातों को बदला जा सकता है। कुछ ऐसी ही मिसाल पेश की है, दिव्यांग महिला उद्यमी सलमा बानो ने। जिन्होंने मसाला प्रसंस्करण और मूल्य संवद्र्धन ने ना केवल खुद को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाया है। बल्कि, गांव की महिलाओं का एक समूह बनाकर उन्हें भी सशक्तिकरण की राह दिखाई है। इसी का परिणाम है कि सलमा अब सालाना 5 लाख रूपए का शुद्ध मुनाफा कमा रही है। महिला उद्यमी सलमा ने हलधर टाइम्स को बताया कि परिवार के आर्थिक हालात ज्यादा ठीक नहीं थे। घर बैठे कुछ करने की मंशा ने मुझे केवीके से जोड़ दिया। केन्द्र की महिला वैज्ञानिक कमला महाजनी के सामने जब दो पैसे आय की बात मैने रखी तो उन्होंने मुझे मसाला प्रसंस्करण की सलाह दी। शुरूआत घर से हुई, बाद में गांव की महिलाओं का साथ मिल गया। इसी का परिणाम है कि क्षेत्र में समावेश सांई कृपा स्वयं सहायता समूह अब अपनी पहचान बना चुका है। उन्होंने बताया कि कोरोना काल क दौरान समूह परिचालन में थोड़ी दिक्कत जरूर आई। लेकिन, अब समूह अपनी पूरी क्षमता के साथ काम कर रहा है।
कई मसालों का विपणन
उन्होंने बताया कि क्षेत्र में पैदा होने वाले खड़े मसालों की बाजार से खरीद करती हॅू। साथ ही, समूह ब्रांड नेम के साथ मसालों की पैकिंग करती हॅू। फिर, इनको स्थानीय बाजार, प्रदर्शनी और मेलो में विक्रय करती हॅू। इससे उपभोक्ताओं के साथ जुड़ाव भी बढ़ता है। साथ ही, आमदनी भी ज्यादा मिलती है। उन्होंने बताया कि प्रसंस्करण के काम से सालाना 5 लाख रूपए का लाभ मिल रहा है।
अचार-पापड़ भी
उन्होंने बताया कि कोरोना काल से सबक लेते हुए एक कदम और आगे बढ़ाया। अब समूह अचार, पापड़, मंगौडी और कपड़ा बैग भी तैयार कर रहा है। इससे समूह की प्रत्येक महिला को मासिक 6 हजार रूपए की आय होने लगी है।
स्टोरी इनपुट: डॉ.आरएल सोंलकी, केवीके, चित्तौडग़ढ़