गुलाबी आंतक से आधा रह गया रकबा

नई दिल्ली 06-Apr-2026 04:25 PM

गुलाबी आंतक से आधा रह गया रकबा

(सभी तस्वीरें- हलधर)

पीयूष शर्मा

जयपुर। बीटी कपास की बीजी-2 किस्म का तिलिस्म टूटने के साथ ही कपास के रकबे में बड़ी गिरावट दर्ज हुई है। इस गिरावट से राष्ट्रीय स्तर पर उत्पादन प्रभावित हुआ है। वैज्ञानिकों का कहना है कि जब तक गुलाबी सुंड़ी प्रतिरोधी किस्म बाजार में नहीं आ जाती है, किसानों के लिए बीटी कपास की खेती आर्थिक नुकसान का सबब बनी रहेगी। बता दें कि पिछले 5 साल में राजस्थान ही नहीं, पंजाब और हरियाणा राज्य में भी बीटी कपास का बुवाई क्षेत्र बुरी तरह से प्रभावित हुआ है। हालात यह है कि पिंक बॉल वर्म प्रकोप के कारण इन सभी राज्यों मेें तेजी से बुवाई और उत्पादन के आंकड़े में गिरावट दर्ज हुई है। गिरावट का यह आंकड़ा सैकडा में नहीं, लाख हैक्टयर में है। गौरतलब है कि वर्ष 2022-23 से कपास उत्पादक राज्यों में पिंक बालवर्म का प्रकोप बीटी कपास की फसल में दर्ज हो रहा है। वर्ष 2023-24 के दौरान श्रीगंगानगर और हनुमानगढ़ में गुलाबी सुंड़ी के प्रकोप से 20 से 90 फीसदी तक फसली नुकसान दर्ज हुआ। इसके बाद सरकार और कृषि वैज्ञानिकों ने मिलकर आवश्यक कदम उठाएं। लेकिन, बीटी कपास बुवाई क्षेत्र में गिरावट अब भी जारी है। कृषि वैज्ञानिकों का मानना है कि किसानों में विश्वास बहाली के लिए पिंक बॉलवर्म प्रतिरोधी बीटी किस्म की जरूरत है। क्योंकि, तकनीकी प्रबंधन के उपाय से ज्यादा बीज का प्रतिरोधी होना मायने रखता है। 

क्या है गुलाबी सुंड़ी
प्रौढ़ अवस्था में कीट आकार में छोटे और रंग में गहरे भूरे होते हैं। इनकी अगली पंखों पर काले धब्बे होते हैं। पिछली पंख किनारों से झालरनुमा होती हैं। रात को सक्रिय रहने वाला कीट है। नमी के वातावरण में यह बहुत एक्टिव हो जाता है और फसल की अन्तिम अवस्था तक बना रहता है। प्रत्येक वर्ष नरमा के खेत में फूल आने के समय इसकी मादा पतंगों की पहली पीढी 
फु लगुड्डी पर अथवाॢ उनके नजदीकी टहनियों, छोटी और नई पत्तियों के निचले हिस्सों पर एक एक करके सफेद और चपटे अंडे देती हैं। इसके बाद वाली पीढियां अपने अंडे एक-एक करके ही फूलों के बाह्यपुंजदल पर देती हैं। 

आबादी का विस्फोट
सामान्यतौर पर 3 से 4 दिनों में इन अंडों से छोटी सूंडियाँ निकलती हैं। लेकिन, तापमान और नमी की अनुकूलता के चलते आबादी का विस्फोट होता है। प्रारम्भिक अवस्था में ये सूंडियाँ हल्के सफेद रंग की होती हैं। परन्तु बाद में इनका रंग गुलाबी हो जाता है जिसकी वजह से इसका नाम गुलाबी सुंडी पड़ा है। ये सूंडियां कपास की फसल में फूलगुड्डीयों व फूलों पर हमला करती हैंएओर फूल के अंदर घुसती हैएओर वहीं रहने लगती हैं। सूंडियों से ग्रसित फूल के हिस्से आपस में जुड़ जाते है और पूरी तरह नही खुलते। कपास के ये ग्रसित फूल बनावट में फि रकी अथवा गुलाब के फूल जैसे हो जाते हैं। 

कीटनाशी प्रभावी क्यों नहीं
एसकेआरएयू के निदेशक अनुसंधान डॉ. एनके शर्मा ने बताया कि
शुरुआती अवस्था में ही यह छोटी सूंडियां छोटे-छोटे टिंडों में घुस कर कच्चे बिनौले को खाती हैं। टिंडे में घुसने के बाद ये अपने द्वारा बनाएं अपने सुराख को अपने मल से ही बंद कर देती है। जिससे इन पर किसी कीटनाशक का असर नही भी नही होता है। और इससे एक समस्या ओर है कि  जो छेद बंद किया जाता है उसमे फंगस का आक्रमण भी हो जाता है और समस्या दोगुनी हो जाती है।

1.45 लाख हैक्टयर गिरा रकबा
प्रदेश में पिछले पांच साल के दौरान कपास बुवाई क्षेत्र में करीब 1.45 लाख हैक्टयर की गिरावट दर्ज हुई है। साथ ही, उत्पादन भी घटा है। वर्ष 2020-21 में 8.07 लाख हैक्टयर क्षेत्र में कपास की बुवाई हुई। जबकि, वर्ष 2024-25 के दौरान बुवाई क्षेत्र घटकर 6.62 लाख हैक्टयर रह गया। इसी तरह वर्ष 2021 में उत्पादन 32.07 लाख बेल था। जो वर्ष 2025 में गिरकर 26.25 लाख बेल रह गया। 

50 फीसदी तक गिरावट
नजर डाले पंजाब और हरियाणा की तो इन राज्यों में कपास बुवाई क्षेत्र वर्ष 2020-21 की तुलना में आधा रह गया है। वर्ष 2020-21 के दौरान पंजाब में 2.52 लाख हैक्टयर में बुवाई दर्ज हुई थी। जो वर्ष 2024-25 में घटकर 1 लाख हैक्टयर रह गई। वहीं, हरियाणा में 2.64 लाख हैक्टयर की बड़ी गिरावट बुवाई क्षेत्र में आई है। वर्ष 2020-21 में इस राज्य में 7.40 लाख हैक्टयर में कपास की बुवाई हुई थी। जो पिछले साल घटकर 4.76 लाख हैकटयर तक सीमित होकर रह गई है। 


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