कपास में पिंक बॉलवर्म चुनौती, अधिकारियों की बेपरवाही किसान पर भारी
(सभी तस्वीरें- हलधर)जयपुर। ये कैसा फरमान, हर कोई हैरान। जी हां, कृषि आयुक्तालय द्वारा जारी एक फरमान इन दिनों चर्चा में है। क्योंकि अपने आदेश में विभाग ने सांप पर नहीं, बांबी फूँकने पर फोकस किया है। इससे स्पष्ट हो जाता है कि समस्या के मूल तक जाना और किसान को राहत की बात विभागीय अधिकारियो की रीति-निती में शामिल नहीं है। शायद यही कारण है कि बीटी कपास बीज की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए बीज प्रदाता कंपनी से कर्मचारी से 500 रूपए के स्टाम्प पेपर पर शपथ पत्र लिया जा रहा है। जबकि, पड़ौसी राज्य पंजाब में 25 रूपए के स्टाम्प पेपर पर कंपनी के निदेशक, पार्टनर और एकल स्वामित्व रखने वाले व्यक्ति से शपथ पत्र लिया जा रहा है। बीज गुणवत्ता को लेकर की जा रही इस अनदेखी से विभागीय अधिकारियों पर सवाल उठ खड़ा हुआ है। सूत्रो ने बताया कि कंपनी कार्मिक से शपथ पत्र लेने का कोई औचित्य नहीं है। क्योंकि, कार्मिक कंपनी में आज है, कल नहीं। यदि इस बीच बीटी कॉटन का बीज अमानक निकल जाता है तो बीज प्रदाता कंपनी सीधे तौर पर कानूनी कार्यवाही से बचकर निकल जाएंगी। जबकि, पंजाब सरकार ने अमानक बीज बिक्री की रोकथाम के लिए आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 की धारा 10 के तहत भी बीज प्रदाताओं की जिम्मेदारी तय की है।
क्या कहती है धारा 10
यदि कोई कंपनी अधिनियम के नियमों का उल्लंघन करती है, तो न केवल वह कंपनी, बल्कि अपराध के समय कंपनी के कारोबार के प्रभारी और उसके लिए जिम्मेदार कोई भी व्यक्ति भी दोषी माना जाएगा। लेकिन, यहां ऐसा कोई क्लॉज बीटी कॉटन की अनुमति के लिए जारी दिशा-निर्देशों में शामिल नहीं है। गौरतलब है कि विभाग के द्वारा 31 मार्च तक बीज प्रदाता कंपनियों से ऑनलाइन आवेदन मांगे गए है।
पिंक बॉलवर्म बड़ी चुनौति
कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि कपास उत्पादक किसानों के लिए सफेद मक्खी के बाद पिंक बॉलवर्म (गुलाबी सुंड़ी) बड़ा खतरा बन चुकी है। पिछले तीन-चार सालों से इस सुंड़ी का प्रकोप फसल में लगातार हो रहा है। सुंड़ी से होने वाले नुकसान को देखते हुए किसानों ने बीटी कपास से मुंह मोडऩा शुरू कर दिया है। इससे बावजूद कृषि विभाग के अधिकारी आंखे मूंदे नजर आ रह है। बता दें कि बीटी कपास की बीजी-2 किस्मों को सभी प्रकार की सुंड़ी के प्रति प्रतिरोधक माना गया है। लेकिन, बीजी-2 किस्मों में गुलाबी सुंड़ी का प्रकोप इसके जीन पर सवाल खड़ा करने लगी है। इस स्थिति में पिंक बॉलवर्म प्रतिरोधी किस्मों को किसान तक पहुंचाना जरूरी हो जाता है। लेकिन, कृषि विभाग के दिशा-निर्देशों में प्रतिरोधी किस्मों को लेकर कुछ नहीं कहा गया है।
अंकुरण जांच तक सीमित
सूत्रों ने बताया कि बीटी कपास बीज की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए कृषि विभाग गुण नियंत्रण अभियान चलाता है। अभियान के तहत बीज के नमूने लेकर विश£ेषित किए जाते है। जिसमें मुख्यत: बीज की अंकुरण क्षमता देखी जाती है। जबकि, मौजूदा परिस्थितियों में किसानों को जरूरत गुलाबी सुंड़ी प्रतिरोधी बीज की है। विभाग ने कहा है कि खरीफ 2025 में बीटी जीन आमनक पायी गई किसमों को विक्रय अनुमति प्रदान नहीं की जायेगी। यानी, $कृषि विभाग शेष सभी दूसरी किस्मों को सुंड़ी प्रतिरोधी मान चुका है।