9 करोड़ का 'कागजी खेल' बेनकाब, PM फसल बीमा का महाघोटाले का पर्दाफाश

नई दिल्ली 07-May-2026 06:54 PM

9 करोड़ का 'कागजी खेल' बेनकाब, PM फसल बीमा का महाघोटाले का पर्दाफाश

(सभी तस्वीरें- हलधर)

राजस्थान के हनुमानगढ़ जिले से प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) में सेंधमारी का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। प्रदेश के कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा ने पल्लू स्थित SBI (भारतीय स्टेट बैंक) की शाखा पर औचक छापेमारी कर करीब 9 करोड़ रुपये के फर्जी बीमा क्लेम के एक बड़े नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है। मंत्री की इस त्वरित कार्रवाई से सरकारी खजाने को चूना लगाने की साजिश क्लेम जारी होने से महज कुछ दिन पहले ही विफल कर दी गई।

फर्जी किसानों का 'सिंडिकेट': 162 बाहरी लोग बने 'ऋणी किसान'

प्रारंभिक जांच और छापेमारी में जो तथ्य सामने आए हैं, वे चौंकाने वाले हैं। आरोप है कि बैंक अधिकारियों और भू-माफियाओं की मिलीभगत से एक संगठित नेटवर्क काम कर रहा था।

  • फर्जी खाते: 162 ऐसे व्यक्तियों के बचत खाते खोले गए जो क्षेत्र के मूल निवासी भी नहीं थे।
  • कागजी हेरफेर: इन भूमिहीन लोगों को बैंक पोर्टल पर 'ऋणी किसान' के रूप में दर्शाया गया।
  • काल्पनिक रिकॉर्ड: राजस्व रिकॉर्ड में जो खसरा और मुरब्बा नंबर मौजूद ही नहीं हैं, उन्हें फर्जी तरीके से पोर्टल पर अपलोड कर खरीफ 2025 की मूंगफली फसल का बीमा कर दिया गया।

गजनेर तहसीलदार की रिपोर्ट ने खोली पोल

जब कृषि मंत्री ने संदिग्ध सूची का सत्यापन गजनेर तहसील से करवाया, तो रिपोर्ट ने अधिकारियों के होश उड़ा दिए। तहसीलदार की रिपोर्ट के मुताबिक, सूची में शामिल 162 नामों में से किसी भी व्यक्ति के नाम पर संबंधित गांवों में कोई भूमि दर्ज नहीं है। सभी खसरा नंबर हर तरीके से फर्जी पाए गए, जिसके बाद इस 'कागजी खेती' का सच सामने आ गया।

बैंक मैनेजर से तीखे सवाल: "दिखाइए जमाबंदी"

छापेमारी के दौरान बैंक के भीतर जबरदस्त हंगामा देखने को मिला। मंत्री डॉ. मीणा ने ब्रांच मैनेजर अंकुश मिगलानी से जब इन 162 'किसानों' की जमाबंदी और भूमि रिकॉर्ड मांगे, तो बैंक प्रबंधन कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे सका। मंत्री ने मौके पर ही मौजूद मीडिया के सामने बैंक की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए और मैनेजर को आड़े हाथों लिया।

इस दौरान कृषि मंत्री किरोड़ी लाल मीणा ने कहा कि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना देश के अन्नदाता के लिए है, लेकिन कुछ भ्रष्ट अधिकारी और माफिया इसे अपनी जागीर समझकर लूट रहे हैं। इस 9 करोड़ के घोटाले में शामिल एक भी दोषी बख्शा नहीं जाएगा।

कैसे रचा गया यह 'खेला'?

विशेषज्ञों के अनुसार, यह घोटाला बैंकिंग सॉफ्टवेयर और बीमा पोर्टल के बीच के सत्यापन गैप का फायदा उठाकर किया गया। कैटेगरी चेंज करके सामान्य बचत खातों को सिस्टम में 'एग्रीकल्चर लोन' खातों में बदला गया। पोर्टल पर फर्जी खसरा नंबर फीड किए गए ताकि बीमा कंपनी को लगे कि वास्तव में बुवाई हुई है।

क्लेम की तैयारी: फसल खराबे की आड़ में सामूहिक रूप से 9 करोड़ का क्लेम तैयार किया गया, जिसे इसी सप्ताह खातों में ट्रांसफर होना था। कृषि मंत्री ने स्पष्ट किया है कि इस मामले में सख्त कानूनी कदम उठाए जा रहे हैं। ब्रांच मैनेजर सहित संलिप्त बैंक कर्मियों पर FIR दर्ज की जाएगी।

सभी 162 संदिग्ध खातों को फ्रीज करने के निर्देश दिए गए हैं। उच्च बैंक अधिकारियों को पत्र लिखकर दोषी कर्मचारियों के निलंबन की अनुशंसा की गई है। बीमा कंपनी के प्रतिनिधियों की भूमिका की भी उच्च स्तरीय जांच होगी।


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