हाईब्रिड मक्का बना घाटे का सौदा, देसी मक्का बाजार में चमका
(सभी तस्वीरें- हलधर)जयपुर। संकर मक्का की खेती से सरकार भले की अपना हित साध रही हो। विदेशी मुद्रा कमा रही हो। लेकिन, हाईब्रिड़ मक्का से किसानों का भला होता नजर नहीं आ रहा है। क्योंकि, बाजार में किसानों को मक्का के दाम एमएसपी से नीचे मिल रहे है। इससे उन्हें प्रति क्विंटल 600 से 800 रूएप प्रति क्विंटल तक घाटा उठाना पड़ रहा है। जबकि, सरकार का जोर हाइब्रिड़ के जरिए एथेनॉन, पोल्ट्री उद्योग की बढ़ती मांग को पूरा करना है। गौरतलब है कि बाजार में देसी मक्का के दाम ज्यादा बोले जा रहे है। जबकि, हाईब्रिड़ मक्का औने-पौने दाम पर खरीदी जा रही है। बता दें कि सरकार ने मक्का उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए एक नई पॉलिसी तैयार की है। लेकिन, मक्का उत्पादक किसानों को सरकार ने अपने हाल छोड़ दिया है। धरियावद के किसान संतोष अहारी ने बताया कि हाईब्रिड़ मक्का बीज से उत्पादन तो ज्यादा मिलता है। लेकिन, बाजार में भाव काफी कम मिलते है। इस कारण मक्का की फसल घाटे को सौदा बनने लगी है।
यह है स्थिति
गौरतलब है कि सरकार ने चालू वित्तीय वर्ष के लिए मक्का का एमएसपी 2400 रूपए प्रति क्विंटल घोषित किया हुआ है। जबकि, बाजार में संकर मक्का के भाव 1500-1700 रूपए प्रति क्विंटल ही बोले जा रहे है। इससे प्रति क्विंटल 600-800 रूपए का नुकसान हो रहा है। जबकि, मंडियों में देसी मक्का के भाव 2500 रूपए प्रति क्विंटल से ऊपर बोल जा रहे है।

15 फीसदी का खाने में उपयोग
सरकार द्वारा जारी एक रिपोर्ट के मुताबिक सकल उत्पादन में से महज 15 फीसदी मक्का का उपयोग खाने में हो रहा है। जबकि, पोल्ट्री फीड इंडस्ट्री 44 प्रतिशत , बायोएथेनॉल प्रोडक्शन में 18 प्रतिशत, स्टार्च में 12 प्रतिशत और एनिमल फीड में 11 प्रतिशत हो रहा है। इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मक्का रिसर्च, लुधियाना के वरिष्ठ वैज्ञानिक शंकर लाल जाट का कहना है कि पोल्ट्री, बायोफ्यूल और स्टार्च इंडस्ट्री में लगातार बढ़ोतरी के साथ, भारत में मक्के की घरेलू डिमांड काफी बढऩे की उम्मीद है।
बना इथेनॉल का फीडस्टॉक
मक्का अब इथेनॉल के सस्ते फीड स्टॉक के रूप में उभर रहा है। 2024-25 के लिए, लगभग 10,020 मिलियन लीटर इथेनॉल सप्लाई किया गया है, जिसमें फ़ीडस्टॉक एलोकेशन में 45.65 प्रतिशत मक्का, 27.52 प्रतिशत गन्ना, 22.25 प्रतिशत चावल और 4.54 प्रतिशत खराब अनाज का योगदान रहा है।