कृषि सखियों को प्रशिक्षण में मिली बीजामृत से दशपर्णी अर्क तक की जानकारी
कृषि सखियों को प्रशिक्षण में मिली बीजामृत से दशपर्णी अर्क तक की जानकारी
(सभी तस्वीरें- हलधर)जालोर जिले में कृषि विज्ञान केन्द्र केशवना द्वारा 16 से 20 फरवरी तक आयोजित कृषि सखी/सीआरपी संस्थागत कार्यक्रम के तहत पाँच दिवसीय प्राकृतिक खेती प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुक्रवार को समापन हुआ। प्रशिक्षण में 46 कृषि सखियों को प्राकृतिक खेती की उन्नत एवं व्यवहारिक तकनीकों की विस्तृत जानकारी दी गई।
बीजामृत से दशपर्णी अर्क तक की दी जानकारी
प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को प्राकृतिक खेती की प्रमुख विधियों जैसे बीजामृत, जीवामृत, घनजीवामृत, आच्छादन तथा प्राकृतिक कीट नियंत्रण के लिए नीमास्त्र, ब्रह्मास्त्र, अग्नास्त्र और दशपर्णी अर्क के उपयोग के बारे में विस्तार से बताया गया। विशेषज्ञों ने इन तकनीकों के व्यावहारिक उपयोग और लाभों पर भी प्रकाश डाला।
प्राकृतिक खेती अपनाने का किया आह्वान
समापन समारोह के मुख्य अतिथि कृषि विभाग के संयुक्त निदेशक रामलाल जाट ने किसानों से प्राकृतिक खेती अपनाने का आह्वान करते हुए कहा कि यह पद्धति आत्मनिर्भर और टिकाऊ कृषि प्रणाली की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कृषि सखियों की ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता फैलाने में अहम भूमिका बताई।
मिट्टी की उर्वरता और लागत में कमी पर जोर
केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं अध्यक्ष डॉ. दिलीप कुमार ने प्राकृतिक खेती के सिद्धांतों और महत्व पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने बताया कि प्राकृतिक खेती से मिट्टी की जैविक सक्रियता बढ़ती है, भूमि की उर्वरता में सुधार होता है तथा खेती की लागत में कमी आती है। इससे दीर्घकालीन कृषि स्थिरता और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलता है। कार्यक्रम के अंत में सभी 46 कृषि सखियों को प्रमाण पत्र वितरित किए गए। कार्यक्रम में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने का संकल्प दिलाया गया। इस अवसर पर प्राकृतिक खेती योजना प्रभारी बीरम सिंह गुर्जर, डॉ. पवन कुमारी पारीक, सुमन शर्मा, नाहर सिंह देवड़ा, मनीष चौधरी और कृषि पर्यवेक्षक उर्मिला चौधरी सहित अन्य उपस्थित रहे।