मेवाड़ में फल-फूल रहा है किन्नू

नई दिल्ली 30-Oct-2025 12:20 PM

मेवाड़ में फल-फूल रहा है किन्नू

(सभी तस्वीरें- हलधर)

चित्तौडग़ढ। किन्नू की खेती के लिए हनुमानगढ-श्रीगंगानगर ही नहीं, मेवाड़ की जलवायु भी अनुकूल है। यह साबित हुआ है कृषि विज्ञान केन्द्र, चितौडग़ढ़ के द्वारा किए गए अनुसंधान में। केंद्र के वैज्ञानिकों का कहना है कि यदि किन्नू की खेती को जिले में प्रोत्साहित किया जाएं तो यह कि सानों के लिए नगद आमदनी को सौदा बन सकती है। इससे किसानों की आर्थिकी में सुधार संभव है। केन्द्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. रतनलाल सोलंकी ने बताया कि केन्द्र पर 2 हैक्टयर क्षेत्र में किन्नू का बगीचा स्थापित है। इन दिनों लगभग सभी पौधें फलों से लकदक नजर आ रहे है। उन्होने बताया कि फलों के रंग, आकार और प्रति पौधा उत्पादन को देखते हुए यह कहा जा सकता है कि मेवाड़ की धरा को किन्नू की फसल रसीली बना सकता है। जबकि, यहां की मिट्टी किन्नू की खेती के अनुकू ल नहीं है। फिर भी, पौधें बेहत्तर उत्पादन दे रहे है।

दो दशक तक उत्पादन

उन्होने बताया कि किन्नू की खेती में सबसे बड़ा फायदा यह है कि एक बार पौध लगाने पर 20-25 साल तक बेहत्तर उत्पादन मिलता है। इस फल की खेती से मात्र डेढ़ से 2 बीघा क्षेत्र में डेढ़ से पौने दो लाख रूपए की आमदनी आसानी से मिल जाती है।

सेहत का खजाना है किन्नू

किन्नू में विटामिन सी की मात्रा सबसे ज्यादा पाई जाती है। इसके खाने से शरीर में खून बढ़ता है। हड्डियां मजबूत होती हैं। साथ ही, किन्नू को खाने से पाचन शक्ति बेहतर रहती है। इसके सेवन से कई गंभीर बीमारियों का जोखिम काफी हद तक कम हो जाता है।

प्रति पौधा 20-25 किलो तक उत्पादन

उन्होने बताया कि केन्द्र पर लगे बगीचे में प्रति पौधा 20-25 किलोग्राम तक फल का उत्पादन मिल रहा है। हालांकि, उत्पादन का स्तर श्रीगंगानगर और हनुमानगढ़ की तुलना में कम है। फिर भी, किन्नू की फसल से संभाग के किसानों को टिकाऊ आय मिलना संभव है। उन्होने बताया कि थोक में किन्नू की बिक्री 25-28 रूपए प्रति किलो के भाव से होती है। जबकि, रिटेल में 50-60 रूपए प्रति किलो के भाव से बिक्री होता है। ऐसे में किन्नू से आय का गणित स्वत: ही समझा जा सकता है।


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