पराली प्रबंधन के लिए 46 हज़ार मशीनों का होगा वितरण
(सभी तस्वीरें- हलधर)केंद्र का जन-जागरण, रियल टाइम मॉनिटरिंग और तकनीकी समाधान पर जोर
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान और केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने कृषि भवन, नई दिल्ली में पराली प्रबंधन और इसके स्थायी समाधान पर एक उच्च स्तरीय अंतर-मंत्रालयी बैठक की अध्यक्षता की। बैठक में चौहान ने कहा कि पराली जलाने से न केवल पर्यावरण प्रदूषित होता है, बल्कि, धरती माता का स्वास्थ्य भी प्रभावित होता है। इससे मित्र कीट नष्ट होते हैं, मिट्टी की उर्वरता घटती है और प्रदूषण के कारण जनस्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। इस दृष्टि से इसे रोकना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने बताया कि सीआरएम योजना के अंतर्गत 544.15 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है जिसमें से पहली किस्त के रूप में 272.07 करोड़ रुपये जारी किए जा चुके हैं। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार, राज्य सरकारों, आईसीएआर संस्थानों, कृषि विज्ञान केंद्रों, स्थानीय निकायों तथा किसानों के निरंतर प्रयासों से पिछले वर्षों में पराली जलाने की घटनाओं में उल्लेखनीय कमी आई है।
910 कस्टम हायरिंग केंद्रों की स्थापना
उन्होंने बताया कि राज्यों ने चालू वर्ष के लिए 46,000 से अधिक फसल अवशेष प्रबंधन मशीनों का वितरण, 910 कस्टम हायरिंग केंद्रों की स्थापना और 141 पराली आपूर्ति श्रृंखला परियोजनाओं का विकास किया जाएगा बैठक में वर्ष 2026 की धान कटाई के दौरान अनुमानित 2.762 करोड़ टन पराली के प्रबंधन के लिए राज्यों द्वारा तैयार कार्ययोजनाओं की भी समीक्षा की गई। बैठक में विशेष रूप से कम अवधि में तैयार होने वाली और कम पानी की आवश्यकता वाली धान की किस्मों को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया जिससे धान कटाई और गेहूं बुवाई के बीच उपलब्ध समयावधि बढ़ाई जा सके।
अगस्त से पहले मशीनों का वितरण
दोनों मंत्रियों ने बायोमास विद्युत संयंत्रों, संपीड़ित बायोगैस (सीबीजी) इकाइयों, एथेनॉल उत्पादन संयंत्रों और पेलेट निर्माण इकाइयों के माध्यम से पराली के एक्स-सीटू उपयोग को और सुदृढ़ करने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि ऐसे प्रयास पराली के लिए स्थायी बाजार तैयार कर रहे हैं और कृषि अवशेषों को आर्थिक संसाधनों में परिवर्तित कर रहे हैं। बैठक में कार्यक्रम के प्रभावी क्रियान्वयनके लिए स्थापित निगरानी और संस्थागत व्यवस्थाओं की भी समीक्षा की गई। बताया गया कि फसल अवशेष प्रबंधन के लिए गठित अंतर-मंत्रालयी समिति नियमित समीक्षा बैठकें आयोजित कर रही हैं। राज्यों को अगस्त 2026 से पहले मशीनों का वितरण पूर्ण करने, कस्टम हायरिंग केंद्रों को मजबूत बनाने, उपलब्ध मशीनरी का पूर्ण उपयोग सुनिश्चित करने तथा व्यापक जन-जागरूकता अभियान चलाने की सलाह दी गई है।