राज्य के मुख्य सचिव ने किया ग्राम से जुड़े ख़ास अभियान का शुभारंभ
(सभी तस्वीरें- हलधर)राज्य के मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने शुक्रवार को भीलवाड़ा जिले के प्रवास के दौरान “मुख्यमंत्री विकसित ग्राम अभियान” के तहत ग्राम पंचायत स्वरूपगंज में आयोजित प्रथम ग्राम सभा में भाग लेकर अभियान का विधिवत शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने अभियान की प्रगति एवं तैयारियों का जायजा लिया। साथ ही राजीविका स्टॉल का अवलोकन कर महिला स्वयं सहायता समूहों द्वारा किए जा रहे कार्यों की सराहना की और उनका उत्साहवर्धन किया।
विकसित भारत 2047 के विजन से जुड़ा अभियान
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्य सचिव ने कहा कि यह अभियान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की “विकसित भारत 2047” की परिकल्पना के अनुरूप तैयार किया गया है। इसमें युवा, नारी शक्ति, गरीब और अन्नदाता को केंद्र में रखकर योजनाएं बनाई जा रही हैं, ताकि समावेशी विकास सुनिश्चित हो सके।
आधारभूत ढांचे और औद्योगिक विकास पर फोकस
मुख्य सचिव श्रीनिवास ने कहा कि प्रदेश में आधारभूत संरचना के विकास, औद्योगिक विस्तार और पूंजीगत व्यय में वृद्धि पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। भीलवाड़ा जैसे औद्योगिक जिलों में टेक्सटाइल और स्पिनिंग सेक्टर को और अधिक सुदृढ़ करने की दिशा में भी कार्य किया जाएगा।
जनभागीदारी से बनेगा विकास का खाका
श्रीनिवास ने अभियान की रूपरेखा बताते हुए कहा कि यह जन-केंद्रित और सहभागी योजना है, जिसके अंतर्गत 19 मार्च से 15 मई तक ग्राम पंचायत और वार्ड स्तर पर व्यापक जनभागीदारी के साथ विकास योजनाएं तैयार की जाएंगी। प्रत्येक पंचायत में पेयजल, सड़क, बिजली, स्वच्छता, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तृत आकलन किया जाएगा।
GIS आधारित प्लानिंग से तैयार होंगे मास्टर प्लान
मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने बताया कि GIS आधारित प्लानिंग के माध्यम से अल्पकालीन (2030 तक), मध्यकालीन (2035 तक) और दीर्घकालीन (2047 तक) विकास योजनाएं बनाई जाएंगी। ग्राम स्तर से प्राप्त सुझावों को पंचायत समिति और जिला स्तर पर समेकित कर प्रत्येक जिले के लिए लक्ष्य-आधारित मास्टर प्लान तैयार किया जाएगा।
डिजिटल प्लेटफॉर्म से बढ़ेगी पारदर्शिता
श्रीनिवास ने कहा कि सभी योजनाओं को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर अपलोड किया जाएगा, जिससे पारदर्शिता और प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित होगा। साथ ही ग्रामवासियों से अपील की कि वे ग्राम सभा में सक्रिय भागीदारी निभाते हुए अपनी जरूरतों और सुझावों को साझा करें, ताकि आने वाले वर्षों की विकास रूपरेखा स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप बन सके।