मनरेगा खत्म? जी राम जी से बदलेगा ग्रामीण रोजगार का भविष्य
(सभी तस्वीरें- हलधर)इन्हीं कारणों से 2005 से प्रभावी नरेगा, जिसे 2009 में मनरेगा कहा गया की जगह मोदी सरकार ने वीबी जी राम जी कानून का श्रीगणेश किया। स्वाधीनता के बाद से ही जरूरत के हिसाब से विभिन्न योजनाओं के स्वरूप में बदलाव किए जाते रहे हैं। 1960 के दशक में तत्कालीन सरकार ने ग्रामीण रोजगार योजनाओं की शुरुआत की और ग्रामीण श्रमशक्ति कार्यक्रम लागू किए गए। समय की मांग के अनुरूप समय-समय पर विभिन्न सरकारें इनमें फेरबदल करती रहीं। परिणामस्वरूप देश में राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार कार्यक्रम , ग्रामीण भूमिहीन रोजगार गारंटी कार्यक्रम, संपूर्ण ग्रामीण रोजगार योजना और रोजगार आश्वासन योजना इत्यादि लागू की गईं। 2005 में राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम(नरेगा) कार्यक्रम शुरू किया गया। 2009 में इसमें महात्मा गांधी का नाम जोड़कर नरेगा से मनरेगा कर दिया गया। नए और तेजी से बदलते आर्थिकए सामाजिक और तकनीकी परिदृश्य में मनरेगा एक प्रभावी योजना के तौर पर खरी साबित नहीं हो पा रही थी। साथ ही इसमें बडे पैमाने पर भ्रष्टाचार हो रहा था। इसके अतिरिक्त मनरेगा एक कल्याणकारी गरीबी उन्मूलन कानून के रूप में सीमित था। जबकि, आज का ग्रामीण युवा विकसित भारत-2047 के सपनों को साकार करने के लिए संकल्पित है।

ताकि, सतत विकास हो सके। अब चार स्पष्ट श्रेणियों जल संरक्षण, आधारभूत संरचना, आजीविका और प्राकृतिक आपदा से जुडे कार्य तय किए गए हैं। नए कानून में 40 के बजाय 50 प्रतिशत खर्च निर्माण सामग्री पर होगा। इनका निर्णय दिल्ली में बैठे लोग नहीं, बल्कि स्थानीय स्तर पर एक ग्राम समिति कार्यक्रम तय करेगी। मनरेगा में मजदूरी भुगतान में देरी की बडी समस्या थी। इससे श्रमिक वर्ग परेशान रहता था। जी राम जी में मजदूरी भुगतान साप्ताहिक अथवा पाक्षिक रूप से अनिवार्य होगा। फि र डिजिटल माध्यम से मजदूरी भुगतान का प्रविधान भ्रष्टाचार की संभावना को खत्म करेगा। कई मीडिया रिपोट्र्स हैं कि मनरेगा में कुछ राज्यों में ठेकेदारों को फायदा पहुंचाया गया। जी राम जी बायोमीट्रिक अटेंडेंस, संपत्ति की जियो टैगिंग और रियल टाइम डैशबोर्ड के उपयोग का प्रावधान करता है। इससे भ्रष्टाचार और फर्जी लाभार्थियों में निश्चित रूप से कमी आएगी। इसके अलावा मनरेगा की तरह जी राम जी भी कानून श्रमिकों को समय पर काम नहीं मिलने पर उनके बेरोजगारी भत्ता प्रविधानों को जारी रखता है और अधिकार आधारित हकदारी को प्रशासनिक दक्षता के साथ संतुलित करता है। मनरेगा की एक अन्य कमी थी। केंद्र और राज्यों का अपेक्षाकृत कम समन्वय और राज्यों में जवाबदेही का अभाव। नई योजना में पहाड़ी और पूर्वोत्तर राज्यों में केंद्र सरकार 90 प्रतिशत योगदान करेगी। केवल 10 प्रतिशत राज्य देंगे।
बाकी राज्यों को केंद्र 60 प्रतिशत देगा। राजनीतिक-मनोवैज्ञानिक आकलन के अनुसार जब अपना पैसा लगता है तो कार्य की गुणवत्ता निश्चित बेहतर होती है। विपक्षी दलों के विरोध में कहीं न कहीं यह भाव भी है कि नए कानून का नाम राम पर क्यों रखा गया है। देश में नई योजनाओं कार्यक्रमों के लिए नए नाम रखने की परंपरा रही है। जी राम जी नाम से गांधीजी की कहीं अवमानना नहीं होती। क्योंकि, नया नाम तो स्वयं गांधीजी के आराध्यदेव प्रभु राम पर आधारित है। जी राम जी कानून रोजगार गारंटी का विस्तार करके, वित्तीय अनुशासन को मजबूत करके, तेज भुगतान सुनिश्चित करके, काम को कृषि चक्रों के साथ जोड़कर और फोकस को अल्पकालिक राहत से टिकाऊ ग्रामीण विकास की ओर ले जाकर रोजगार और ग्रामीण विकास को नई ऊंचाइयों पर ले जाने का संकल्प दिखाता है।