गर्मियों में बढ़ती फूलों की मांग, नवरंगा की खेती से कई गुना बढ़ेगी आय
गर्मियों में बढ़ती फूलों की मांग, नवरंगा की खेती से कई गुना बढ़ेगी आय
(सभी तस्वीरें- हलधर)किसान भाइयों के लिए नवरंगा (गैलार्डिया) की खेती एक बेहतरीन विकल्प बनकर उभर रही है, खासकर गर्मियों के मौसम में जब अन्य फूलों की उपलब्धता कम हो जाती है। ऐसे समय में नवरंगा की बाजार में अच्छी मांग रहती है और किसान इससे बेहतर मुनाफा कमा सकते हैं। नवरंगा कम्पोजिट कुल का सदस्य है। इसका मूल उत्पत्ति स्थान अमरीका है। सबसे अच्छी बात यह है कि नवरंगा की खेती आसान है। यह कम लागत में तैयार हो जाती है और अलग-अलग मौसम में भी सफलतापूर्वक की जा सकती है।
नीचे नवरंगा की खेती करने के लिए सभी जरूरी जानकारी दी जा रही है। किसान भाई जानकारी को अपनाकर गैलार्डिया (इंडियन ब्लैंकेट, नवरंगा) की खेती कर अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं।
जलवायुः शीतोष्ण और उष्ण।
भूमि तैयारीः बलुई दोमट, दो बार अच्छी जुताई जरूरी।
नवरंगा की प्रमुख किस्म:
इसमें प्रमुखतः दो समूह होते हैं।
1. गैलार्डिया पिक्टा: इन्डियन चीफ, पिक्टा मिश्रित आदि।
2. गैलार्डिया लोरेन्जियाना: सनशाइन, गैरी डबल मिक्स, डबल टेट्रा किस्म।
बीज बोने का समय: मार्च-अप्रैल
बुवाई का तरीकाः क्यारी में बुवाई करें। क्यारी को भूमि से थोड़ा ऊंचा उठाकर बनाएं। क्यारी का आकार 3 मीटर गुना 1 मीटर रखें। बीज को 5 सेंमी गहरा बोकर उसे अच्छी तरह मिट्टी से ढकें।
बीज की मात्रा: 1.5-2.0 किलो बीज प्रति हैक्टयर
गोबर खाद: 250-300 क्विंटल प्रति हैक्टयर।
पौध रोपण और पौध दूरी: बोने के 5-6 सप्ताह में पौधों को खेत में लगाएं।
कतार की दूरी: 45 सेमी
पौध की दूरी: 45 सेमी।
ख़ास सलाह: कम मेहनत और अच्छे बाजार भाव के कारण नवरंगा की खेती किसानों की आय बढ़ाने का एक मजबूत विकल्प साबित हो सकती है।
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