यहां किसान गले में नुकीले लोहे के कॉलर पहनकर कर रहे खेती

नई दिल्ली 24-Nov-2025 03:21 PM

यहां किसान गले में नुकीले लोहे के कॉलर पहनकर कर रहे खेती

(सभी तस्वीरें- हलधर)

अब तक पालतू जानवरों और मवेशियों के गले में नुकीले लोहे के कॉलर दिखाई देते थे, लेकिन अब इंसानों को भी ये तरीका अपनाना पड़ रहा है। जो खतरा पहले पालतू जानवरों और मवेशियों को था, वहीं खतरा अब इंसानों के सामने भी मंडरा रहा है। दरअसल, नुकीले लोहे के कॉलर पालतू जानवरों और मवेशियों को जंगली जानवरों के हमले से बचाने में मददगार साबित होते हैं। हालांकि, अब इंसान भी अब इस डर से दहशत में हैं। ऐसे ही कुछ मामले महाराष्ट्र में देखने को मिल रहे हैं। यहां पुणे जिले के पिंपरखेड़ गांव के किसानों को गले में नुकीले कॉलर पहनकर खेती करनी पड़ रही हैं। इसकी वजह इलाके में जंगली जानवर तेंदुओं की मौजूदगी से खतरा माना जा रहा है। बीते कुछ महीनों में तेंदुओं के कई बार हमलों ने स्थानीय लोगों में दहशत फैला दी है। यहां तक कि हालात ऐसे हो चुके हैं कि खेतों में काम करने वाले किसान और मजदूर अब अपनी सुरक्षा के लिए नुकीले लोहे के कॉलर पहनकर ही खेतों में काम करने जा रहे हैं। 

जान जोखिम में डालकर करना पड़ता है काम

पिंपरखेड़ के किसानों का कहना है कि क्षेत्र में तेंदुओं की मौजूदगी अब आम बात हो गई है। यहां हम रोज तेंदुओं को देख रहे हैं। खेती छोड़ नहीं सकते, इसलिए जान जोखिम में डालकर खेतों में जाना पड़ता है। ग्रामीणों ने बताया कि एक महीने एक महिला पर तेंदुए ने हमला कर दिया था और उसे गन्ने के खेतों में खींचकर ले गया। उससे पहले एक छोटी बच्ची की भी मौत भी तेंदुए के हमले से हो चुकी है। गन्ने के खेत तेंदुओं के छिपने के लिए प्राकृतिक आवास का काम करते हैं। रात और सुबह के समय तेंदुए इंसानों और मवेशियों पर वार करने लगे हैं। किसानों का कहना है कि हालिया घटनाओं ने गांव के लोगों को मानसिक रूप से असुरक्षित कर दिया है। ग्रामीणों ने प्रशासन से कई बार शिकायत कर तेंदुओं को पकड़कर सुरक्षित स्थान पर भेजने की मांग की है। उधर, वन विभाग का कहना है कि गांव में पिंजरे लगाए गए हैं और निगरानी बढ़ाई गई है। हालांकि, स्थानीय ग्रामीण वन विभाग की ओर से किए गए इंतजाम को पर्याप्त नहीं मान रहे हैं।

किसानों ने प्रशासन से स्थाई समाधान की मांग की

आपको बता दें कि अभी दो सप्ताह पहले ही वन विभाग और रेस्क्यू टीम ने एक आदमखोर तेंदुए को मार गिराया था। इसके बाद भी तेंदुओं के हमलों का सिलसिला थम नहीं रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन को तेंदुओं की मौजूदगी के स्थायी समाधान की दिशा में तत्काल कदम उठाने होंगे। पिंपरखेड़ गांव में किसान सुबह-शाम अपने खेतों पर जाने में किसान खतरा महसूस कर रहे हैं। कई परिवार अपने बच्चों को अकेले बाहर निकलने से रोक रहे हैं। वहीं, क्षेत्र में तेंदुए की आवाज़ सुनने या पदचिन्ह दिखने पर पूरा गांव अलर्ट मोड पर चला जाता है। ग्रामीणों की प्रशासन से मांग है कि उन्हें सुरक्षा चाहिए, ताकि वे बिना डर के अपने खेतों में काम कर सकें और उनकी रोजमर्रा की जिंदगी पहले की तरह सामान्य हो पाए।

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